नृत्य
SSC Exams
⬥ भारतीय शास्त्रीय नृत्य तकनीक जैसेरस और भाव की उत्पत्ति हुई है - भरतमुनि के नाट्यशास्त्र से
⬥ लावणी, पोवाड़ा, कोली, वाघ्या मुरली और धनगारी गाजा लोक नृत्य है - महाराष्ट्र के
⬥ सत्रिया का एकांकी नाटक कहलाता है - अंकिया नट
⬥ भारत के अधिकांश शास्त्रीय नृत्य रूपों की उत्पत्ति हुई है - नाट्य शास्त्र से
⬥ गोवा का वह नृत्य रूप जिसे 'योद्धा नृत्य' के नाम सेभी जाना जाता है - घोड़े मोदनी
⬥ मणिपुरी नृत्य किसकी रासलीला थीम पर आधारित है - राधा और कृष्ण की
⬥सत्त्रिया (असम) को संगीत नाटक अकादमी द्वारा शास्त्रीय नृत्य के रूप मेंमान्यता दी गई - 2000 में
⬥ यूनेस्को नेकेरल के अनुष्ठान-नाटक 'मुडियेट्टू' को 'मानवता की अमूर्तसांस्कृतिक विरासत' के रूप मेंमान्यता दी - 2010 में
⬥ थुल्लल नृत्य की उत्पत्ति हुई - केरल से
⬥ खासी जाति का 'का शाद मस्तियेह' या विजय नृत्य का संबंध है - मेघालय से
⬥ मैमाता एक लोकप्रिय लोक नृत्य है - त्रिपुरा का
⬥ भरतनाट्यम नृत्य पारंपरिक रूप सेकिया जाता है - कर्नाटक संगीत में
⬥ ठुमरी संगीत सम्बंधित है - कथक (उत्तर प्रदेश) से
⬥ मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य के पुरुष प्रारूप को कहा जाता है - चोलोम्स
⬥ कथकली नृत्य के पूर्वमेंएक अभ्यास सत्र को बुलाया जाता है, जिसे कहा जाता है - 'सेवाकाली
⬥ वह अभिनय जो वेशभूषा, आभूषण, चेहरे के मेकअप आदि के उपयोग सेसंबंधित है - आहार्यअभिनय
⬥ सिद्धियोंका गुजरात मेंलगभग 300 वर्षों का सांस्कृतिक इतिहास है, जो जाने जाते हैं - अपने अनूठेनृत्य सिद्धि धमाल के लिए
⬥ नटवारी नृत्य का संबंध है - कथक नृत्य से
⬥ डंडारी-गुसाडी त्यौहार मनाया जाता है - राज गोंड और कोलम जनजाति द्वारा
⬥ झारखंड का पाइका नृत्य प्रस्तुत (पुरुष सदस्य) किया जाता है - मुंडा जनजाति द्वारा
⬥ गौर मारिया, एक नृत्य शैली है - छत्तीसगढ़ का
⬥ लेबांग बूमनी नृत्य फसल कटाई का नृत्य है - त्रिपुरा का
⬥ भरतनाट्यम पर ब्रिटिश सरकार नेप्रतिबंध लगा दिया था - 1910 में
⬥ महाराष्ट्र मेंअसत्य पर सत्य की जीत का जश्न मनाया जाता है - सोंगी मुखावटेनृत्य द्वारा
⬥ सोंगी मुखावटेनृत्य है - महाराष्ट्र का
⬥ सोंगी मुखावटेनृत्य नरसिंह को प्रतिनिधित करता है - भगवान विष्णु के रूप में
⬥ रिखम पद नृत्य का संबंध है - अरुणाचल प्रदेश से
⬥ मृदुऔर महिलाओंके लिए उपयुक्त प्रस्तुति को कहा जाता है - लास्य
⬥ भारतीय शास्त्रीय नृत्योंमेंदो मौलिक पहलू होते हैं - लास्य और तांडव
⬥ 'कथक' शब्द की उत्पत्ति हुई है - कहानी से
⬥ शास्त्रीय नृत्य की तकनीक को 5वींशताब्दी ईसा पूर्वमेंसंहिताबद्ध किया गया था - भरत मुनि द्वारा
⬥ लम्बाडी नृत्य एक लोक नृत्य शैली है - बंजारा जनजाति की
⬥ कालबेलिया (स्नेक चार्मर डांस) एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ कालबेलिया नृत्य किया जाता है - कालबेलिया समुदाय द्वारा
⬥ बाल्टी नृत्य का संबंध है -लद्दाख से
⬥ शरीर के गतियोंके माध्यम सेअर्थ को संवहन करनेके रूप को जाना जाता है - आंगिक अभिनय
⬥ मुंडा जनजाति का मुंडारी नृत्य संबंधित है - झारखंड से
⬥ टपू नृत्य किया जाता है - अरुणाचल प्रदेश की आदि जनजाति द्वारा
⬥ चाली, झुमुरा और नाडु भंगी रूप हैं - सत्त्रिया शास्त्रीय नृत्य के
⬥ ढिम्सा लोक नृत्य पोरजा जनजातियोंद्वारा किया जाता है अराकूघाटी (आंध्र प्रदेश) में
⬥ कांडियन नृत्य एक पारंपरिक नृत्य रूप है - श्रीलंका का
⬥ टिप्पनी, हुडो, मेर रास, पल्ली जग गराबो लोक नृत्य हैं - गुजरात के
⬥ कथक नृत्य का संबंध है - हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से
⬥ गैर लोक नृत्य भील समुदाय द्वारा किया जाता है - राजस्थान राज्य में
⬥ 'नट' पारंपरिक गायन शैली हैजो सम्बंधित है - मणिपुरी नृत्य से
⬥ रास, संकीर्तन और थांग-ता लोकप्रिय रूप हैं - मणिपुरी नृत्य के
⬥ मणिपुरी नृत्य का सबसे प्रारंभिक रूप है - लाई हरोबा
⬥ डोल्लू कुनिथा, भूत और बालाकट नृत्य संबंधित हैं - कर्नाटक राज्य से
⬥ ढोल को रंग-बिरंगेवस्त्रों सेसजाया जाता है - डोल्लू कुनिथा के नृत्य में
⬥ लाहो नृत्य किया जाता है - मेघालय की जयन्तिया जनजाति द्वारा
⬥पाइका नृत्य मुंडा जनजाति द्वारा किया जाता है - छोटा नागपुर पठार के क्षेत्र में
⬥ चविट्टूकाली नृत्य सम्बंधित है - केरल राज्य से
⬥ गुग्गा लोक नृत्य पुरुषों द्वारा किया जाता है - हरियाणा में
⬥ तेवितिचियाट्टम, नंगई नाटकम और दासियाट्टम - मोहिनीअट्टम नृत्य के रूप हैं
⬥ गरबा, डांडिया रास, टिप्पनी जुरियुन नृत्य लोकप्रिय हैं - गुजरात राज्य में
⬥ झारखंड में 'सरहुल' नृत्य का त्योहार प्रस्तुत किया जाता है - उरांव जनजाति द्वारा
⬥ जगोई और थाबल चोंगबा प्रसिद्ध नृत्य हैं - मणिपुर के
⬥ सरायकेला छऊ लोकप्रिय नृत्य है - झारखंड का
⬥ घुरि लोक नृत्य (महिलाओंद्वारा) किया जाता है - हिमाचल प्रदेश क्षेत्र में
⬥ चरी लोक नृत्य मुख्य रूप सेमहिलाओंद्वारा किया जाता है - राजस्थान में
⬥ कमसालेलोक नृत्य है - कर्नाटक का
⬥ पदायनी लोक नृत्य भद्रकाली मंदिर मेंकिया जाता है - केरल के
⬥ मिजोरम के बांस नृत्य को कहा जाता है - चेरव नृत्य
⬥ मुख्य रूप सेकथक सेसंबंधित रियासत थी - अवध
⬥ पखावज अक्षरोंका प्रयोग किस शास्त्रीय नृत्य को समाप्त करने के लिए किया जाता है- ओडिसी
⬥ वह नृत्य जिसमेंचित्रित मुखौटे, बड़ी स्कर्ट, भारी जैकेट, बहुत सारे आभूषण और लंबेहेडड्रेस शामिल हैं - कथकली
⬥ वह नृत्य जहां नर्तक विपरीत दिशाओंमें संकेंद्रित वृत्तोंके साथ वामावर्तवृत्त बनातेहैं- गरबा नृत्य में
⬥ कुचिपुड़ी, एक यक्षगान शैली है, जिसकी कल्पना सिद्धेंद्र योगी नेकी थी - 17वींशताब्दी में
⬥ भारतीय संगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैलियों की संख्या है - 8
⬥ झिझिया नृत्य अच्छी बारिश और फसल के लिए बारिश के देवता ‘इंद्र’ को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है - बिहार में
⬥ वह जनजाति जो असम मेंबागुरुम्बा लोक नृत्य करती है - बोडो जनजाति ⬥ ग्रिडा लोक नृत्य सम्बंधित है - मध्य प्रदेश से
⬥ 'गोंफ' एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है - गोवा का ⬥ कुड, एक लोक नृत्य है , जो सम्बंधित है - जम्मू और कश्मीर से
⬥ चांग लो आदिवासी नृत्य चांग जनजाति द्वारा किया जाता है - नागालैंड में
⬥ गुणकांत दत्ता बोरब्यान को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सेसम्मानित किया गया - सत्त्रिया नृत्य के लिए
⬥ फुगड़ी एक लोक नृत्य है - गोवा का ⬥ ताशी सबदो नृत्य सम्बंधित है - सिक्किम से
⬥अग्नि, मर्दाना झूमर, फगुआ नृत्य संबंधित हैं - झारखंड से
⬥ कोली लोक नृत्य है - महाराष्ट्र और गोवा का
⬥ लंबाडी' लोक नृत्य सम्बंधित है - आंध्र प्रदेश से
⬥ चूफाट एक लोक नृत्य है - सिक्किम का
⬥ ज़ो माल लोक नृत्य का संबंध है - सिक्किम से
⬥ मोहिनीअट्टम नृत्य महिलाओंद्वारा किया जाता है - भगवान विष्णु के सम्मान में
⬥ गोटीपुआ, ओडिशा का नृत्य, किया जाता है - भगवान जगन्नाथ के सम्मान में
⬥ भामा कलापम शास्त्रीय नृत्य-नाटिका संबंधित है - कुचिपुड़ी से
⬥ सैला, पंथी, पंडवानी, राऊत नाचा नृत्य संबंधित हैं - छत्तीसगढ़ से
⬥ घोडेमोडिनी लोक नृत्य है - गोवा का ⬥ छोलिया, मार्शल नृत्य संबंधित है - उत्तराखंड से
⬥ कथक के प्रमुख विषय जुड़ेहुए हैं - वैष्णववाद से
⬥ भांगड़ा, लुड्डी, गिद्दा लोक नृत्य हैं - पंजाब के
⬥ जागोई और चोलोम दो मुख्य प्रभाग हैं - मणिपुरी नृत्य के
⬥ असम का सत्त्रिया नृत्य प्रेरित है - भक्ति आंदोलन से
⬥ शास्त्रीय कृति 'हस्तलक्षण दीपिका' नृत्य संबंधित है - कथकली से
⬥ मटकी नृत्य का सम्बन्ध है - मध्य प्रदेश से
⬥ गुग्गा, खोरिया और फाग नृत्य संबंधित हैं - हरियाणा से
⬥ हुरका बाउल नृत्य, मक्का और धान की खेती के दौरान किया जाता है - उत्तराखंड में
⬥ कुम्मी नृत्य का संबंध है - तमिलनाडुसे
⬥ चेराव लोक नृत्य सम्बंधित है - मिजोरम से
⬥ भरतनाट्यम को मूल रूप सेजाना जाता था - सादिर अट्टम के नाम से
⬥ गोटीपुआ एक पारंपरिक नृत्य शैली है - ओडिशा की
⬥ मोहिनीअट्टम मेंहाथ के इशारेजो मुख्य रूप से हस्तलक्षण दीपिका पाठ सेअपनाए गए, वेहै- 24
⬥ गवरी, नृत्य-नाटिका का सम्बन्ध है - राजस्थान से
⬥ पुरुलिया, मयूरभंज, सरायकेला उपप्रकार हैं - छऊ नृत्य के
⬥ चारु सिजा माथुर एक पर्याय है - मणिपुरी नृत्य का
⬥ कोलन्नालु, लोक नृत्य जिसेलोकप्रिय रूप से जाना जाता है - छड़ी नृत्य के नाम
⬥ वांगला प्रसिद्ध लोक नृत्य है - मेघालय का
⬥ भरतनाट्यम नृत्य का विकास हुआ - 'एकहार्यलस्यांगा' से
⬥ कोणार्क नृत्य महोत्सव हर साल 5 दिनोंके लिए आयोजित किया जाता है - ओडिशा मे
⬥ वर्णम शास्त्रीय नृत्य किसके चरणोंमेंसेएक है - भरतनाट्यम के
⬥ खजुराहो नृत्य उत्सव को भारत सरकार ने मध्य प्रदेश कला परिषद के सहयोग सेशुरू किया था - 1975 में
⬥ खोन, मास्कड ड्रामा नृत्य प्रस्तुति, जो भगवान राम की महिमा को दर्शाती है, संबंधित है - थाईलैंड से
⬥ थेय्यम, एक धार्मिक कला रूप है - केरल का
⬥ वीरा नाट्यम एक अनुष्ठानिक नृत्य शैली है - आंध्र प्रदेश की
⬥ लोटिया क्षेत्रीय संगीत है - राजस्थान का
⬥ भगवान कृष्ण के जीवन पर आधारित एक प्रकार का लोक नाट्य है - 'रासलीला
⬥"यक्षगान" लोक नृत्य का संबंध है - कर्नाटक से
⬥ छऊ नृत्य को यूनेस्को की अमूर्तसांस्कृतिक विरासत सूची मेंशामिल किया गया था - 2010 मे
⬥ लद्दाख की बौद्ध जप संगीत को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची मेंशामिल किया था - 2012 में
⬥ वैदिक जप की परंपरा को यूनेस्को की अमूर्त स्कृतिक धरोहर सूची मेंशामिल किया गया था - 2008 मे
⬥ एक ऐसा फ्रीस्टाइल नृत्य जिसमेंकलाकार जलते हुए धूप सेभरेमिट्टी के बर्तनोंके साथ नृत्य करते हैं - धुनुची नाच
⬥ भरतनाट्यम के प्राचीन नृत्य शिक्षक या गुरु की लोकप्रिय रूप सेकहा जाता है - नट्टुवानार
⬥ वीधि-भागवतम' एक प्रसिद्ध नृत्य शैली है - आंध्र प्रदेश की
⬥ लावणी लोक नृत्य है - महाराष्ट्र का
⬥ भारतीय शास्त्रीय नृत्योंमेंप्रयोग होनेवालेहाथ के इशारोंको कहा जाता है - मुद्रा
⬥ घूमर पारंपरिक रूप सेप्रदर्शित किया जाता है - भील जनजाति (राजस्थान) द्वारा
⬥ मयूरभंज छऊ नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है - ओडिशा में
⬥ पुरुलिया छऊ नृत्य का प्रदर्शन किया जाता है - पश्चिम बंगाल में
⬥ रास लीला की शुरुआत सबसेपहले 1779 में एक नृत्य शैली के रूप मेंहुई थी - भाग्यचंद्र (मैतेई राजा) द्वारा
⬥ डंडा-नाचा (ओडिशा का एक नृत्य रूप) कहानी के बारेमेंबताता है - भगवान शिव की
⬥ गौर मारिया नृत्य का संबंध है - छत्तीसगढ़ से
⬥ कुचिपुड़ी नृत्य का वह तत्व जिसमेंकलाकार पीतल की थाली के किनारेपर अपनेपैरोंको संतुलित करता है - तरंगम
⬥ कथक मेंनर्तक और तबला वादक के बीच प्रतिस्पर्धात्मक खेल है - जुगलबंदी
⬥ प्रेम को सर्वोत्तम रूप सेअभिव्यक्त करनेवाला रस है - शृंगार रस
⬥ मुडियेट्टूकेरल का एक अनुष्ठानिक नृत्य नाटक हैजो युद्ध की पौराणिक कहानी पर आधारित है - देवी काली और दानव दारिका के बीच
⬥ 'नाट्य शास्त्र' के अनुसार, मोहिनीअट्टम एक रूप है - लास्य नृत्य का
⬥ मोहिनीअट्टम नृत्य, नृत्य और गायन के माध्यम सेएक नाटक का भाव प्रकट करता हैजहां गीत पारंपरिक रूप सेहोता है - मणिप्रवाला भाषा में
⬥ नागालैंड का एक नृत्य रूप जो शिकार अभियान की तैयारी के रूप मेंकिया जाता है, जिसेजाना जाता है - सदल केकाई के नाम से
⬥ पैरोंको मोड़कर लय बनाए रखनेवाली नृत्य मुद्रा है - भरतनाट्यम
⬥ चिदम्बरम मंदिर के गोपुरम पर अंकित शास्त्रीय नृत्य शैली है - भरतनाट्यम
⬥ भरतनाट्यम किस दक्षिण भारतीय धार्मिक विषयों और आध्यात्मिक विचारोंको व्यक्त करता है - शैव धर्मके
⬥ दसकठिया आदिवासी नृत्य है - ओडिशा का
⬥ झारखंड की संथाल जनजाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य है - झिका दशईं
⬥ चांगई नृत्य का संबंध है - नागालैंड से
⬥ अलारिप्पुएक नृत्य मुद्रा है - भरतनाट्यम की
⬥ थाबल चोंगबा लोक नृत्य है - मणिपुर का
⬥ भवई (वेश या स्वांग) लोकप्रिय लोकनाट्य रूप है - गुजरात का
⬥ पाइका, घुमरा और ढप लोक नृत्य हैं - ओडिशा का
⬥ रायगढ़ घराना सम्बंधित है - कथक से
⬥ जामदा लोक नृत्य का संबंध है - झारखंड से
⬥ कलासम एक नृत्य क्रम है - कथकली का
⬥ कजरी एक लोक गीत और नृत्य हैजिसकी उत्पत्ति हुई थी - उत्तर प्रदेश में
⬥ छऊ नृत्य मौजूद है - 3 मुख्य शैलियोंमें
⬥ कलाक्षेत्र शैली का संबंध है - भरतनाट्यम से
⬥ कुड लोक नृत्य है - जम्मूएवं कश्मीर का
⬥ भरतनाट्यम की सैद्धांतिक नींव पाई गई है - नाट्य शास्त्र में
⬥ वज़ुवूर शैलियोंमेंसेएक है - भरतनाट्यम की
⬥ लुड्डी एक लोक नृत्य है - पंजाब का
⬥ रास-लीला को किस शास्त्रीय नृत्य शैली के रूप मेंमान्यता प्राप्त है - मणिपुरी के
⬥ कथक नृत्य का सबसेपुराना घराना - बनारस
⬥ भोरताल नृत्य प्रसिद्ध है - असम में
⬥ लाई हरोबा सबसेप्रारंभिक रूप है - मणिपुरी नृत्य का
⬥जोएंपा लेग्सो एक स्वागत नृत्य है - भूटान का
⬥ माटी-अखौरा का सम्बन्ध है - सत्त्रिया नृत्य से
⬥ नलचरितम नाटक संबंधित है - कथकली से
⬥ मध्य प्रदेश की कमार जनजाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य है - तेरह ताली
⬥ मंगलाचरण, स्थाई, पल्लवी, अभिनया और मोक्ष भाग हैं - ओडिसी नृत्य के
⬥ मुख्य रूप सेनवरात्रि के दौरान किया जानेवाला पारंपरिक नृत्य है - गरबा
⬥ भगवान जगन्नाथ की पूजा सेसंबंधित नृत्य शैली है - ओडिसी
⬥ शास्त्रीय नृत्य शैली जिसकी शुरुआत केलिकोट्टू नामक ड्रम वादन सेहोती है - कथकली
⬥ ज़ंगतालम मिज़ोरम का एक लोकप्रिय नृत्य हैजो प्रस्तुत किया जाता है - पैहतेजनजाति द्वारा
⬥ गैर नृत्य किया जाता है - राजस्थान के भील समुदाय द्वारा
⬥ कारगम लोक नृत्य का संबंध है - तमिलनाडुसे
⬥ भूत कोला, एक आत्मा पूजा अनुष्ठान नृत्य है - कर्नाटक का
⬥ सुग्गी एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है - कर्नाटक का
⬥ तमिलनाडुके मंदिरोंमेंदेवदासियोंद्वारा किया जानेवाला नृत्य है - भरतनाट्यम (दासियाट्टम)
⬥ राजस्थान के सपेरा नृत्य को जाना जाता है - कालबेलिया नृत्य के रूप में
⬥ एकहार्या, जहाँएक नर्तक एक ही प्रदर्शन मेंकई भूमिकाएँनिभाता है, सम्बंधित है - भरतनाट्यम में
⬥ जगोई और चोलोम दो मुख्य भाग हैं - मणिपुरी नृत्य के
⬥सत्रहवींशताब्दी मेंकथकली का दक्षिणी भारत में उद्गम हुआ - कर्नाटक के राजकुमार के संरक्षण में
⬥मिथिला क्षेत्र (बिहार) मेंदशहरेके समय किया जानेवाला नृत्य है - झिझिया
⬥ सांगफाओ आदिवासी नृत्य किया जाता है - अरुणाचल प्रदेश में
⬥अरुणाचल प्रदेश का टापूनृत्य किया जाता है - आदि जनजाति द्वारा
⬥प्रसिद्ध नृत्य शैली चरकुला संबंधित है - उत्तर प्रदेश से
⬥ युद्ध के हिंदूदेवता मुरुगन की पूजा के दौरान किया जानेवाला नृत्य है - कावड़ी अट्टम
⬥ रऊफ लोक नृत्य है - जम्मू-कश्मीर का
⬥ मणिपुरी नृत्य का प्रमुख विषय है - भक्ति
⬥ पंथी नृत्य शैली का संबंध है - छत्तीसगढ़ से
⬥ चिदम्बरम मंदिर (तमिलनाडु) के गोपुरम में दर्शाई गई हैं - भरतनाट्यम की मुद्राएँ
⬥ घूमर एक लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ कुचिपुड़ी नृत्य किया जाता है - कर्नाटक संगीत के साथ
⬥ भरतनाट्यम का संगीत संबंधित है - कर्नाटक शैली से
⬥ चेचक सेठीक होनेके बाद पश्चिम बंगाल मेंकिया जानेवाला एक विशिष्ट नृत्य है - ब्रिता नृत्य
⬥ रंगीन श्रृंगार और अनोखेमुखौटेप्राचीन मार्शल आर्टको दर्शातेहैं - कथकली की
⬥ हाई -हक नृत्य का संबंध है - त्रिपुरा से
⬥ गुग्गा नृत्य एक पारंपरिक लोक नृत्य है - हरियाणा का
⬥ ज़ो-मल-लोक नृत्य सम्बंधित है - लेप्चा समुदाय (सिक्किम) से
⬥ असम के वैष्णव मठोंसेविकसित नृत्य है- सत्त्रिया
⬥ वह नृत्य जिसमेंकलाकार कभी भी दर्शकोंसे नजरेंनहींमिलाता है - मणिपुरी
⬥ महाराष्ट्र की महिलाओंद्वारा प्रस्तुत नृत्य है- लावणी
⬥ तरंगामेल लोक नृत्य सम्बंधित है - गोवा से
⬥ बुइया नृत्य शैली सम्बंधित है- अरुणाचल प्रदेश से
⬥ शास्त्रीय नृत्य शैली जिसमेपात्रोंके प्रतीक के रूप मेंचेहरेपर विभिन्न रंगोंका उपयोग किया जाता है - कथकली
⬥ नृत्य शैली जिसका उल्लेख व्यवहार माला के प्राचीन ग्रंथ मेंकिया गया है - मोहिनीअट्टम
⬥ धामन एक नृत्य शैली है, जिसका संबंध है - हिमाचल प्रदेश से
⬥ रंगाबाती एक लोक नृत्य है - ओडिशा का
⬥ नूपा नृत्य का संबंध है - मणिपुर से
⬥ बोरगीत, एक संगीत रचना हैजिसका उपयोग किया जाता है - सत्त्रिया नृत्य में
⬥ कं जर जनजाति द्वारा किया जानेवाला राजस्थान का पारंपरिक लोक नृत्य है - चकरी
⬥ मुंडारी प्रसिद्ध नृत्य है - झारखण्ड का
⬥ ज़ंगतालम, चैलम, चेराव नृत्य का संबंध है - मिज़ोरम से
⬥ लोक नृत्य होजागिरी का सम्बन्ध है - उत्तर-पूर्वभारत से
⬥ मोहिनीअट्टम का संबंध है - भगवान विष्णुसे
⬥ कथकली का संबंध है - भगवान कृष्ण से
⬥ घूमर नृत्य शैली भील जनजातियोंद्वारा विकसित की गई थी - देवी सरस्वती की पूजा करनेके लिए
⬥ मोहिनीअट्टम नृत्य के प्रदर्शन मेंप्रयुक्त मुख्य ताल वाद्य यंत्र है - एडक्का
⬥ शास्त्रीय नृत्य जिसेकथाकारोंका नृत्य कहा जाता है - कथक
⬥ लोक नृत्य जो देवी दुर्गाऔर महिषासुर के बीच एक दिखावटी लड़ाई को दर्शाता है- डांडिया रास
⬥ बिहू नृत्य सेप्रभावित एक नृत्य शैली है - सत्त्रिया
⬥ झारखंड का नृत्य जो मुख्य रूप सेखेती के मौसम मेंआदिवासी महिलाओंद्वारा किया जाता है - जननी झुमु
⬥ शरद ऋतुके दौरान 'कुलिस' (चाय बागानोंमें काम करनेवालेलोग) द्वारा प्रदर्शन किया जाने वाला असम का नृत्य रूप है - झुमुर
⬥ नृत्य गतिविधियोंके एक भाग के रूप मेंड्रम का प्रमुखता सेउपयोग किया जाता है - पुंग चोलोम (मणिपुरी) में
⬥ वह नृत्य शैली जो उन महिलाओंकी पीड़ा को दर्शाती हैजिनके जीवन साथी घर सेदूर होते हैं - बिरहा
⬥ निहंग सिख योद्धाओंकी पारंपरिक युद्ध शैली गतका की उत्पत्ति हुई है - पंजाब से
⬥ 'मुडियेट्टू' एक पारंपरिक लोक नाट्य रूप है - केरल का
⬥ ‘एलेक्काराडी' एक आदिवासी नृत्य शैली है - केरल की
⬥ भगवान खंडोबा सेसंबंधित 'वाघ्या मुरली' नृत्य की उत्पत्ति हुई है - महाराष्ट्र में
⬥ संगराई लोक नृत्य है - त्रिपुरा का
⬥ मंदिरोंको समर्पित नृत्य जिसेपहलेसादिर के नाम सेजाना जाता था - भरतनाट्यम
⬥ भारत का पहला पारंपरिक नृत्य जिसेनाट्य कला के रूप मेंनया स्वरूप दिया गया है - भरतनाट्यम
⬥ मैतई लोगोंके वैष्णववाद सेसंबंधित नृत्य है - मणिपुरी नृत्य
⬥ उम्मट-आट एक लोक नृत्य शैली हैजो प्रदर्शित की जाती है - कूर्ग (कर्नाटक)
⬥ भरतनाट्यम नृत्य वृत्तांत किया जाता है - नट्टुवनार द्वारा
⬥ लावा एक लोकप्रिय लोक नृत्य है - मिनिकॉय द्वीप
⬥ दक्षिण मालाबार का एक लोकप्रिय मुखौटा नृत्य है – कुमट्टिकली
⬥ सिर पर कुर्सियां रखकर जलतेहुए दीयोंके साथ महिलाओंद्वारा किया जानेवाला नृत्य है- चरी नृत्य
⬥ वाक्, मूकाभिनय और शुद्ध नृत्य के संयोजन वाला नृत्य है - कुचिपुड़ी
⬥ दशहरा उत्सव के दौरान किया जानेवाला वीरागासेनृत्य है - कर्नाटक राज्य का
⬥ राठवा नी घेर, राठवा जनजाति द्वारा होली के अवसर पर किया जानेवाला नृत्य है - गुजरात का
⬥ रतवाई नृत्य शैली सम्बंधित है- मेवाती जनजाति से
⬥ तिल्लाना शैली सम्बंधित है - भरतनाट्यम से
⬥ चाड सुकरा', मेघालय का एक लोकप्रिय पारंपरिक नृत्य-उत्सव है, जिसेमनाया जाता है - बुआई उत्सव के रूप में
⬥ सिक्किम का वह समुदाय जो परंपरागत रूप से लोक नृत्य चू-फाट सेजुड़ा है - लेप्चा समुदाय
⬥ जवाहरलाल नेहरू मणिपुर नृत्य अकादमी स्थित है - इंफाल में
⬥ कमसालेएक पारंपरिक नृत्य शैली है - कर्नाटक राज्य की
⬥ रिखमपाड़ा एक पारंपरिक नृत्य है - अरुणाचल प्रदेश का
⬥ विशेष रूप सेग्रामीण मेहमानोंद्वारा भाग लिया जानेवाल मिजोरम का नृत्य शैली है - खुआल्लम
⬥ ओडिशा का एक लोक नृत्य जिसमेभगवान कृष्ण के जीवन-चरित्र को दर्शाया जाता है - रणपा नृत्य में
⬥ मैमाता, कलोई समुदाय का एक लोकप्रिय नृत्य है - त्रिपुरा राज्य के
⬥ भांड पाथेर नृत्य शैली है - कश्मीर की
⬥ आलूयट्टूएक लोक-नृत्य रूप है - नागालैंड राज्य का
⬥ बोलक-आट नृत्य शैली का संबंध है - कर्नाटक से
⬥ हॉलिसाका मूल सामूहिक नृत्य है - गुजरात का
⬥ बिरहोर नृत्य एक आदिवासी लोक नृत्य है - झारखंड का
⬥ कलश लेकर महिलाओं द्वारा कियाजानेवाला 'काडसा' नृत्य है - झारखंड का
⬥ एक नृत्य जिसमेपाँच ललित कला रूपोंका सामंजस्यपूर्णसंयोजन है - कथकली
⬥ कोलकाली लोकप्रिय नृत्य शैली है - लक्षद्वीप की
⬥ फसल कटाई के बाद लड़कोंद्वारा किया जाने वाला सैला नृत्य संबंधित है - छत्तीसगढ़ से
⬥ 'लद्दाख का शाही नृत्य है - शोंडोल
⬥ डांगी लोक नृत्य है - हिमाचल प्रदेश का
⬥ दलखाई लोक नृत्य है - ओडिशा का
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⬥ मयूरभंज छऊ नृत्य है - ओडिशा का
⬥ पडयाणी भद्रकाली मंदिर मेंप्रदर्शित एक अनुष्ठानिक नृत्य कला है - केरल का
⬥ पुडुचेरी मेंगराडी लोक नृत्य (रामायण सेसंबंधित) किया जाता है - विल्लियानूर मंदिर में
⬥ सिद्दी धमाल नृत्य का संबंध है - गुजरात से
⬥ 'अलकप' झारखंड और किस राज्य मेंकिया जाने वाला एक पारंपरिक नृत्य-नाटक है? - पश्चिम बंगाल का
⬥ 'हुली वेशा' एक लोकप्रिय लोक नृत्य है - कर्नाटक का
⬥ फसल कटाई नृत्य जो मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र मेंलोकप्रिय है - जवारा नृत्य
⬥ राई मुख्य रूप सेलोक नृत्य है - मध्य प्रदेश का
⬥ आंध्र प्रदेश का एक नृत्य जो छड़ी नृत्य के समान है - कोलानालुनृत्य
⬥ पाइका नृत्य प्रसिद्ध है - ओडिशा में
⬥ रेंगमा मुख्य रूप सेलोक नृत्य है - नागालैंड का
⬥ सत्त्रिया नृत्य की शुरुआत 15वींशताब्दी ई. मेंकी गई थी - संत महापुरुष शंकरदेव द्वारा
⬥ थांग टा एक विशिष्ट मार्शल नृत्य रूप है - मणिपुर का
⬥ केरल के उत्तरी मालाबार क्षेत्र मेंप्रदर्शित की जाने वाली एक लोक कला है - कोलकाली
⬥ हिमाचल प्रदेश का एक लोक नृत्य जो यज्ञ के साथ समाप्त होता है - नाटी नृत्य
⬥ खजुराहो नृत्य महोत्सव की शुरुआत की गई थी - 1975 में
⬥ खजुराहो नृत्य महोत्सव भारत सरकार द्वारा किसके सहयोग सेस्थापित किया गया था? - मध्य प्रदेश कला परिषद के
⬥ भरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य है - तमिलनाडुका
⬥ केरल के दो शास्त्रीय नृत्य है - कथकली और मोहिनीअट्टम
⬥ कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य की उत्पत्ति हुई है - आंध्र प्रदेश में
⬥ मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य है - मणिपुर का
⬥ कथक शास्त्रीय नृत्य है - उत्तर प्रदेश का
⬥ ओडिशा का शास्त्रीय नृत्य है - ओडिसी
⬥ सत्त्रिया शास्त्रीय नृत्य है - असम का
⬥ चांगसांग नृत्य नागालैंड की चांग जनजाति द्वारा किया जाता है - नाक्युलम उत्सव के समय
⬥ रेचुंगमा, घ तो किटो और ची रमुनृत्य हैं - सिक्किम के
⬥ जाट-जटिन लोकप्रिय लोक नृत्य है - बिहार का
⬥ भारतीय शास्त्रीय नृत्य जिसेप्रसिद्ध ऋषि भरत को भगवान ब्रह्मा द्वारा प्रकट किया गया था, जिन्होंने इस नृत्य को संहिताबद्ध किया था -‘नाट्य शास्त्र' में
⬥ हुड़का बोल लोक नृत्य है - उत्तराखंड का
⬥ बार्डो छम लोक नृत्य है - अरुणाचल प्रदेश का
⬥ गौर मारिया लोक नृत्य है - छत्तीसगढ़ का
⬥ डांडिया नृत्य का संबंध है - गुजरात से
⬥ ढालो एक लोकप्रिय अनुष्ठान लोक नृत्य है - गोवा का
⬥ गंभीरा नृत्य, विभिन्न लकड़ी के मुखौटोंका उपयोग करके किया जाता है - पश्चिम बंगाल में
⬥ मांडो लोक नृत्य है - गोवा का
⬥ केरल का पारंपरिक रंगमंच जहाँ 8 दिनोंमें 8 नाटकोंका प्रदर्शन किया जाता है - कृष्णनाट्टम
⬥ माइकल जैक्सन के 1991 के संगीत वीडियो 'ब्लैक ऑर व्हाइट' एकमात्र भारतीय नृत्य शैली से संबंधित है -ओडिसी
⬥ सिक्किमवासी जानेजातेहैं, अपनेअद्भुत मुखौटा नृत्य - चाम के लिए
⬥ शास्त्रीय नृत्य जो अपनेवर्तमान स्वरूप मेंमुगल परंपरा सेप्रभावित है - कथक
⬥ दुम्हल नृत्य शैली का संबंध है - जम्मूएवं कश्मीर से
⬥ नृत्य शैली 'छरही' की उत्पत्ति हुई है - हिमाचल प्रदेश से
⬥ माथुरी लोक नृत्य प्रचलित है - तेलंगाना में
⬥ नट पूजा, बिहू और चोंगली लोक नृत्य हैं- असम के
⬥ मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र का एक लोकप्रिय लोक नृत्य - काठी
⬥ छोलिया नृत्य का संबंध है - उत्तराखंड से
⬥ स्पाओ नृत्य है - लद्दाख का
⬥ चेराव (बांस नृत्य) सम्बंधित है - मिजोरम से
⬥ एक दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली जिसका अर्थहै 'कहानी-नाटक' - कथकली
⬥ भारतीय नृत्य शैली 'मणिपुरी' अधिकतर किस विषय पर आधारित है - कृष्ण-गोपियोंपर
⬥ तपाली और डगला लोक नृत्य है - छत्तीसगढ़ के
⬥ राउत नाचा एक प्रसिद्ध आदिवासी नृत्य है - छत्तीसगढ़ का
⬥ परिचकली एक लोकप्रिय लोक नृत्य है - लक्षद्वीप का
⬥ उत्तर प्रदेश का कजरी लोक नृत्य संबंधित है - वर्षा-ऋतुसे
⬥ मारुनी नृत्य का संबंध है - सिक्किम से
⬥ ओडिशा मेंयुवा लड़कोंद्वारा किए जानेवालेनृत्य संदर्भित है - 'गोटीपुआ' से
⬥ 'डोल्लूकुनिथा' (लोक नृत्य) है - कर्नाटक का
⬥ कलाकार एक बेलनाकार स्कर्टपहनतेहैंजिसे ‘पोटिओई' कहा जाता है - मणिपुरी नृत्य में
⬥ त्रिभंग मुद्रा संबंधित है - ओडिसी नृत्य शैली से
⬥ लाहो नृत्य है - मेघालय का
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⬥ झाली लोक नृत्य है - हिमाचल प्रदेश का
⬥ असम का ‘देवधनी’ नृत्य सम्बंधित है - नाग देवी मनसा से
⬥ मयिलाट्टम (दक्षिण भारत का नृत्य) को जाना जाता है - मयूर नृत्य के नाम से
⬥ नटपूजा एक लोक नृत्य है - असम का
⬥ महरी नृत्य शैली एक नृत्य रूप है - ओडिसी नृत्य का
⬥ झारखण्ड का हुंटा नृत्य सम्बंधित है - संथाल आदिवासी समुदाय से
⬥ मणिपुरी नृत्य मेंअक्सर जीवन के दृश्योंको दर्शाया जाता है - भगवान कृष्ण के
⬥ 'मोहिनीअट्टम' का अर्थहै - मोहिनी (जादूगरनी) का नृत्य
⬥ डोल्लूकुनिथा, कर्नाटक का लोक नृत्य किया जाता है - भगवान शिव के लिए
⬥ 'तिप्पनी' एक प्रसिद्ध नृत्य है - गुजरात का
⬥ भरतनाट्यम मेंप्रयुक्त इशारोंको कहा जाता है - मुद्रा
⬥ चिदम्बरम मंदिर के गोपुरम मेंअनेक मुद्राएँहैं - भरतनाट्यम की
⬥ 'झोड़ा' नृत्य वसंत ऋतुके उत्सव के रूप मेंकिया जाता है - उत्तराखंड में
⬥ मोहिनीअट्टम नृत्य सेसम्बंधित हिंदूदेवता है - भगवान विष्णु
⬥ मोहिनीअट्टम नृत्य मेंप्रयुक्त वाद्ययंत्र है - एडक्का
⬥ कथावाचकोंका शास्त्रीय नृत्य है - कथक
⬥ सत्त्रिया नृत्य शैली की शुरुआत की गई थी - महापुरुष शंकरदेव द्वारा
⬥ कालबेलिया लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ लोक नृत्य जो देवी दुर्गाऔर महिषासुर के बीच एक काल्पनिक संघर्षको दर्शाता है- डांडिया रास
⬥ सत्त्रिया नृत्य शैली प्रभावित है - बिहू नृत्य से
⬥ झारखंड का नृत्य जो मुख्य रूप सेखेती के मौसम मेंआदिवासी महिलाओंद्वारा किया जाता है - जननी झुमर
⬥ कुचिपुड़ी पर आधारित नृत्य नाटिका भामाकल्पम की रचना की गई थी - सिद्धेन्द्र योगी द्वारा
⬥ गरबा और डांडिया गुजरात के लोकप्रिय लोक नृत्य हैं ,जो कियेजातेहैं - नवरात्रि के दौरान
⬥ 'हाय-नृत्य' नामक नृत्य शैली का निर्माण किया गया था - उदय शंकर द्वारा
⬥ शरद ऋतुमें 'कुलियों' द्वारा किया जानेवाला असम का नृत्य है - झुमुर नृत्य
⬥ 'धीमसा' लोक नृत्य है - आंध्र प्रदेश का
⬥ लावणी लोकप्रिय नृत्य है - महाराष्ट्र का
⬥ टप्पूनृत्य किया जाता है - अरुणाचल प्रदेश में
⬥ 'कारागम' लोक नृत्य है - तमिलनाडुका
⬥ भड़म नृत्य लोकप्रिय है - भारिया जनजाति मे
⬥ 'सैला' एक लोक नृत्य हैजो बांस की डंडियोंसे किया जाता है - छत्तीसगढ़ में
⬥ 'अहिराई' लोक नृत्य है - मध्य प्रदेश के भारिया जनजाति का
⬥ 'फुगड़ी' लोक नृत्य है - गोवा का
⬥ 'फुगड़ी' किस महीनेमेंमनाया जाता है - भाद्रपद
⬥ 'फुगड़ी' लोक नृत्य मनाया जाता है - कोंकण क्षेत्र की महिलाओंद्वारा
⬥ भगोरिया नृत्य भीलोंद्वारा किया जाता है - मध्य प्रदेश में
⬥ चेराव नृत्य पारंपरिक बांस नृत्य है - मिज़ोरम का
⬥ यक्षगान एक पारंपरिक रंगमंच है, जिसका विकास हुआ है - कर्नाटक में
⬥ कुमाऊं नी जनजाति की मार्शल आर्टपरंपरा को दर्शानेवाला एक तलवार नृत्य है - छोलिया नृत्य
⬥ लेबांग बूमनी नृत्य एक फसल नृत्य है - त्रिपुरा का
⬥ अजी लामूलोक नृत्य है - अरुणाचल प्रदेश का
⬥ अजी लामूएक लोक नृत्य है, जो किया जाता है - मोनपा जनजाति द्वारा
⬥ चांग लो नृत्य चांग जनजाति द्वारा प्रस्तुत किया जाता है - नागालैंड मे
⬥ जागोई प्रसिद्ध नृत्य शैली है - मणिपुर की
⬥ 'लाहो' एक लोकप्रिय नृत्य है - मेघालय का
⬥ खरैती एक मार्शल नृत्य हैजो तलवारोंके साथ किया जाता है - हिमाचल प्रदेश में
⬥ चुटकी पारंपरिक नृत्य शैली है - सिक्किम की
⬥'खुल्लम’ लोक नृत्य है - मिजोरम का
⬥ हुरका बाउल प्रसिद्ध नृत्य है - उत्तराखंड का
⬥ देवी अम्बा किस नृत्य की अधिष्ठात्री देवी हैं - भवई नृत्य
⬥ 'ग्रिडा' लोक नृत्य है - मध्य प्रदेश का
⬥ भवई एक लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ वह नृत्य जिसमेंनर्तक के सिर पर बर्तनोंको संतुलित करना शामिल है - भवई नृत्य
⬥ पाइका नृत्य एक आदिवासी समुदाय द्वारा प्रस्तुत किया जाता है - झारखंड मे
⬥ एक हाथ मेंतलवार और दूसरेहाथ मेंढाल पकड़कर किया जानेवाला लोक नृत्य है - पाइका नृत्य
⬥ मुंडारी नृत्य का संबंध है - झारखंड से
⬥ 'फाग' लोक नृत्य है - हरियाणा का
⬥ चाम मास्क नृत्य मनाया जाता है - भूटान में
⬥ धनगर पूजा नृत्य शैली है - गोवा की
⬥ गोटीपुआ एक लोक नृत्य है - ओडिशा का
⬥ छऊ नृत्य रूपोंको यूनेस्को की विरासत नृत्योंमें शामिल किया गया है - 2010 में
⬥ सुवा एक लोक नृत्य हैजिसका संबंध है - छत्तीसगढ़ से
⬥ सुवा लोक नृत्य करतेसमय महिलाएं किस पक्षी की तरह अभिनय करती हैं - तोता
⬥'पोनुंग' एक लोक नृत्य है, जिसका संबंध है - अरुणाचल प्रदेश से
⬥ डुम्हाल एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है - जम्मूऔर कश्मीर की
⬥' मंडूक शब्दम, मेंढक की एक कहानी, प्रस्तुत की जाती है - कुचिपुड़ी नृत्य में
⬥ बागुरुम्बा एक समूह नृत्य हैजो किया जाता है - बोडो समुदाय के द्वारा
⬥ झिझिया प्रसिद्ध सांस्कृतिक नृत्य है - बिहार का
⬥ तमाशा एक लोक नाट्य है - महाराष्ट्र का
⬥ काराकट्टम एक पारंपरिक नृत्य है- तमिलनाडुका
⬥ मारुनी नृत्य नेपाली समुदाय का एक समूह नृत्य है - सिक्किम में
⬥ भगवान कृष्ण के दृश्योंका प्रदर्शन किया जाता है - मणिपुरी नृत्य में
⬥ जट-जटिन, बिदेसिया, झिझिया नृत्य शैली हैं - बिहार का
⬥ 'ज़ेलियांग' एक आदिवासी लोक नृत्य है - नागालैंड की
⬥ 'शोंडोल' एक नृत्य शैली है - लद्दाख का
⬥ होजागिरी नृत्य, रियांग समुदाय का एक आदिवासी नृत्य रूप है, जो सम्बंधित है -त्रिपुरा से
⬥ कुचिपुड़ी नृत्य की रचना की गई थी - सीदेन्द्र योगी द्वारा
⬥ घूमर एक पारंपरिक लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ भरतनाट्यम की वंशावली प्राचीन नृत्य से मिलती है - सादिर अट्टम से
⬥ मुखोटा नृत्य आमतौर पर भगवान भूमितायल की पूजा के लिए किया जाता है - उत्तराखंड मे
⬥ कथक का वर्तमान स्वरूप प्रभावित है - मुगल परंपरा से
⬥ ढिमसा एक लोक नृत्य है - आंध्र प्रदेश का
⬥ ढिमसा एक आदिवासी नृत्य शैली है, जो प्रस्तुत की जाती है - पोरजा जाति की महिलाएं द्वारा
⬥ भांड पाथेर थिएटर मुख्य रूप सेएक परंपरा है - जम्मूऔर कश्मीर की
⬥ हल्लीसाका एक समूह नृत्य हैजो मूल रूप सेहै - गुजरात का
⬥ बिरहोर नृत्य एक आदिवासी लोक नृत्य है -झारखंड का
⬥ कड़सा नृत्य एक नृत्य शैली हैजो किया जाता है - 'कलश' को हाथ मेंलेकर
⬥ भूतड़ा कोला एक आध्यात्मिक लोक नृत्य है - कर्नाटक का
⬥ 'लेशलापटु' किसका नृत्य रूप है - नागालैंड
⬥ पोनुंग एक लोक नृत्य शैली है - अरुणाचल प्रदेश की
⬥ छऊ, कलारीपयट्टु, लाज़िम पारंपरिक नृत्य हैं - मार्शल आर्टके
⬥ चेराव एक पारंपरिक नृत्य शैली है - मिजोरम की
⬥ 'रऊफ' एक लोक नृत्य है, जिसका संबंध है - जम्मूऔर कश्मीर से
⬥ बयालता एक नृत्य शैली है - कर्नाटक की
⬥ झूलन एक लोक नृत्य शैली है - राजस्थान की
⬥ पोपिर एक नृत्य शैली है - अरुणाचल प्रदेश की
⬥ पंथी एक नृत्य शैली है - छत्तीसगढ़ का
⬥ धनगर नृत्य गोवा के चरवाहा समुदाय द्वारा किया जाता है -नवरात्र के दौरान
⬥ करमा एक नृत्य शैली है - झारखंड की
⬥ भारत के नाटी लोक नृत्य नेगिनीज बुक ऑफ वर्ल्डरिकॉर्ड्स मेंअपना नाम दर्जकराया है - 2015 मे
⬥ पुंग चोलम नृत्य रूप है - मणिपुर का
⬥ लाई हरोबा उत्सव एक भाग है - मणिपुरी नृत्य का
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⬥ गिद्दा एक लोक नृत्य शैली है - पंजाब का
⬥ तेराताली लोक नृत्य है - राजस्थान का
⬥ बिहू लोक नृत्य है - असम का
⬥ सोनल मानसिंह मशहूर - ओडिसी नर्तक हैं
⬥ जात्रा लोक रंगमंच है - पूर्वी भारत की
⬥ गैर या गेर एक लोक नृत्य शैली है - राजस्थान का
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⬥ सागर के क्षेत्रीय क्षेत्रोंमेंदीपावली के अवसर पर प्रचलित लोक नृत्य है - मोनिया नृत्य
⬥ तुर्रा-कलंगी लोकनाट्य प्रसिद्ध है - निमाड़ क्षेत्र (मध्य प्रदेश) में
⬥ राजस्थान मेंअग्नि नृत्य किया जाता है - जसनाथी सिद्ध संप्रदाय द्वार