वर्धन वंश

वर्धन वंश

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हर्षवर्धन के दरबारी कवि तथा 'हर्षचरित' के लेखक थे - बाणभट्ट

हर्षवर्धन और पुलकेशिन द्वितीय के बीच युद्ध हुआ था - नर्मदा नदी के तट पर

नर्मदा के युद्ध मेंचालुक्य वंश के राजा पुलकेशिन द्वितीय नेहराया था - हर्षवर्धन को

राजा हर्षवर्धन का शासन काल था- 606 से 647 ई तक

बाणभट्ट द्वारा लिखित हर्षवर्द्धन की जीवनी 'हर्षचरित' की रचना की गई थी - संस्कृत में

चीनी यात्री ह्वेन त्सांग नेभारत का दौरा किया था - हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान

हर्षवर्धन का शासन काल था- 606 . से 647 . तक

रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद लिखी गई थी - हर्षवर्धन द्वारा

बाणभट्ट नेएक जीवनी "हर्षचरित्र" लिखी थी - हर्षवर्द्धन की

चीनी बौद्ध तीर्थयात्री ज़ुआन ज़ैंग (ह्वेन त्सांग) भारत आया था - हर्षवर्धन के दरबार में

चालुक्य साम्राज्य पर आक्रमण कर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था - पुलकेशिन II ने

राजा शशांक एक शासक थे - गौड़ साम्राज्य के

पुष्यभूति संस्थापक थे - वर्धन वंश के

राजा हर्षवर्द्धन सिंहासन पर बैठे- थानेश्वर एवं कन्नौज के

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राजा हर्षवर्द्धन थे - पुष्यभूति राजवंश के

चीनी यात्री जो नालंदा आकर एक छात्र और शिक्षक दोनोंके रूप मेंरहा था - ह्वेन त्सांग

एक चीनी बौद्ध भिक्षुजो 627 से 643 . के बीच भारत की अपनी 17 वर्षकी लंबी यात्रा के लिए प्रसिद्ध है - ह्वेन त्सांग

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हर्षवर्धन राजा थे - वर्धन वंश के

ह्वेन त्सांग (ज़ुआन ज़ैंग) नेभारत का दौरा किया था - हर्षके शासनकाल में

महायान संप्रदाय के सिद्धांतोंको प्रचारित करनेके लिए कन्नौज सभा का आयोजन किया गया था - हर्षके शासन काल में

Defence Exams

हर्षवर्द्धन की मृत्युके बाद अरुणाश्व नेकहाँकी सत्ता हथिया ली ? - कान्यकुब्ज की

भारत मेंप्राचीन काल के दौरान, डायरी "मध्य भारत की यात्राओंके अभिलेख" किस चीनी यात्री द्वारा लिखी गया था - जुआनज़ैंग (ह्वेन त्सांग) द्वारा

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विदेशी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार ध्रुवसेन द्वितीय ने हर्षकी सभा मेंभाग लिया था- प्रयाग (इलाहाबाद) में

जुआनज़ैंग (ह्वेन त्सांग) नेअधिकांश समय बिताया था - हर्षवर्धन के दरबार में

रविकीर्तिनेकिस चालुक्य शासक की प्रशस्ति की रचना की - पुलकेशिन द्वितीय