मेले 2

मेले

असम

अम्बुबाची मेला कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी में आयोजित किया जाता है। यह जून के मध्य में आयोजित किया जाता है।

जोन बील मेला असम के मोरीगांव जिले के राजमार्गशहर जगीरोड के पास असमिया कैलेंडर के माघ (जनवरी के मध्य) मेंआयोजित किया जाता है।

बिहार

सोनपुर पशुमेला एशिया के सबसेबड़ेपशुमेलों मेंसेएक है, जो दो नदियों, गंगा और गंडक के संगम पर आयोजित किया जाता है। यह प्रतिवर्ष नवंबर माह मेंकार्तिक पूर्णिमा पर आयोजित किया जाता है।

वैशाली मेला महावीर के जन्मदिन के अवसर पर चित्रा त्रयोदशी को वैशाली मेंआयोजित किया जाता है। यह मूल रूप सेएक जैन त्योहार है, जिसे दिगंबर और श्वेतांबर दोनों जैन समुदायों द्वारा मनाया जाता है।

बौंसी (बांका) मेला मंदार क्षेत्र के ग्रामीण जीवन को दर्शाता है। यह मेला प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी (मकर संक्रांति के दिन) सेशुरू होता हैऔर एक महीनेतक चलता है।

मलमास मेला गर्म कुं ड (हॉट स्प्रिंग्स) मेंस्नान करनेके लिए राजगीर मेंआयोजित किया जाता है।

बक्सर मेला का आयोजन चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (रामनवमी) को होता है।

सिमरिया मेला बेगुसराय के सिमरिया गांव में आयोजित किया जाता है। यह वर्षमेंदो बार गंगा स्नान और बाद मेंदान देनेके लिए आयोजित किया जाता है।

सहोदरा मेला पश्चिमी चंपारण जिलेके सहोदरा में मां सुभद्रा के पुराने मंदिर में थारूओं द्वारा आयोजित किया जाता है।

पितृपक्ष मेला सितंबर माह मेंगया मेंआयोजित होता है।

 

छत्तीसगढ

राजिम माघी पुन्नी मेला (छत्तीसगढ़ का कुं भ मेला) छत्तीसगढ़ की सबसेबड़ी धार्मिक सभाओं मेंसेएक हैजिसमेंलाखों श्रद्धालुशामिल होतेहैं। मध्य रात्रि को की जानेवाली विशेष पूजा मेंभाग लेनेके लिए भक्त एक दिन पहलेराजिम पहुंचतेहैं और तीन पवित्र नदियों अर्थात्महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम 'त्रिवेणी संगम' मेंपवित्र डुबकी लगातेहैं।

नारायणपुर मेला बस्तर जिलेमेंआयोजित किया जाता है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों सेजुड़ा एक उत्सव है।

चंपारण मेला प्रत्येक वर्षरायपुर में'माघ' महीनेमें जनवरी सेफरवरी तक आयोजित किया जाता है।

गुजरात

चित्र-विचित्र मेला सबसेबड़ा आदिवासी त्योहार है। यह मुख्य रूप से 'घरासिया' और 'भील' जनजातियों द्वारा मनाया जाता है। यह साबरकांठा जिले के खेड़ ब्रह्मा तालुका मेंहोली के एक

पखवाड़ेबाद मार्च के महीनेमेंमनाया जाता है। मुख्य मंदिर अरावली की तलहटी के बीच त्रिवेणी संगम नामक एक सुरम्य स्थल पर स्थित है, जो तीन नदियों साबरमती, अकुल और व्याकुल का पवित्र संगम है।

शामलाजी मेला (कार्तिक पूर्णिमा मेला) प्रत्येक वर्षनवंबर के महीनेमेंआयोजित किया जाता है। शामलाजी मंदिर एक प्रसिद्ध वैष्णव तीर्थहैऔर यहां स्थित देवता को गदाधर (गदा धारण करने वाला) और शक्ति गोपाल सहित विभिन्न नामों से

जाना जाता है।

भवनाथ महादेव मेला गुजरात के जूनागढ़ शहर मेंगिरनार पर्वत की तलहटी मेंस्थित भवनाथ महादेव मंदिर के पास मनाया जाता है।

माधवपुर मेला भगवान कृष्ण और रुक्मणी के बीच विवाह का उत्सव है, जिसके बारे मेंकहा जाता हैकि यह विवाह माधवपुर मेंहुआ था।

प्रसिद्ध मेले- कावंत मेला, भाद्रपद अम्बाजी मेला, वौथा मेला (पशुमेला)

 

हरियाणा

सूरजकुं ड अंतर्राष्ट्री य शिल्प मेला (फरीदाबाद) अद्वितीय है क्योंकि यह भारत के हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक कपड़ेकी समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित करता है, और दुनिया का सबसेबड़ा शिल्प मेला है।

कपाल मोचन मेला (गोपाल मोचन) बिलासपुर (यमुनानगर) मेंकार्तिक पूर्णिमा की पूर्वसंध्या पर आयोजित किया जाता है। यह हिंदूऔर सिख दोनोंके लिए एक प्राचीन तीर्थस्थान है।

चेतर चौदस मेला मार्चया वसंत ऋतुके महीनेमें कुरूक्षेत्र के पिहोवा मेंआयोजित किया जाता है। हिंदूऔर सिख दोनों तीर्थयात्री, सरस्वती के पवित्र तालाब मेंस्नान करतेहैं।

मसानी मेला चेचक (small-pox) की देवी के सम्मान मेंआयोजित किया जाता है। मसानी मंदिर गुरूग्राम मेंस्थित है।

प्रसिद्ध मेले- बलदेव छठ मेला, मनसा देवी मेला। 
 

 

हिमाचल प्रदेश

लवी मेला (रामपुर) कार्तिक (नवंबर) मेंआयोजित होनेवाला एक व्यावसायिक मेला है।

वामन द्वादशी मेला हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के सराहन (पच्छाद) मेंमनाया जाता है। यह भगवान विष्णुके पांचवेंअवतार भगवान वामन के अवतार के उपलक्ष्य मेंमनाया जाता है।

मणिमहेश यात्रा/मेला - यह एक धार्मिक मेला है। भगवान शिव इस मेलेके अधिष्ठाता देवता हैं।

नलवाड़ी मेला (पशुमेला) मार्च या अप्रैल के महीनेमेंबिलासपुर शहर मेंआयोजित किया जाता है।

प्रसिद्ध मेले- रोहड़ू मेला, भोज मेला, भरारा मेला, सिपी मेला, काजा मेंलाडाराचा मेला (जुलाई के महीनेमेंगर्मियों की समाप्ति का प्रतीक)। मनाली मेंढुंगरी मेला। सोलन मेंशूलिनी मेला (शूलिनी माता को श्रद्धांजलि)। अर्की मेंसायर मेला (सांडों की लड़ाई के लिए जाना जाता है)। पिपलूमेंपिपलू मेला (जून माह में)। रेणुकाजी मेंरेणुका मेला (भगवान परशुराम और उनकी माता रेणुका के मिलन के उपलक्ष्य मेंप्रतिवर्ष मनाया जाता है), माघ साजी (मकर संक्रांति)

 

जम्मूऔर कश्मीर

बहु मेला वर्ष में दो बार (मार्च-अप्रैल) और (सितंबर-अक्टूबर) के दौरान बाहु किला (जम्मू) में काली मंदिर मेंआयोजित एक प्रमुख त्योहार है।

पुरमंडल मेला (फरवरी-मार्च) - शिवरात्रि के समय तीन दिवसीय मेला लगता है।

झिरी मेला (किसान मेला) बाबा जीतूनामक किसान की पवित्र आत्मा की पूजा करनेके लिए मनाया जाता है। यह अक्टूबर-नवंबर के महीनोंमें आयोजित किया जाता है।

 

झारखंड

कोल्हैया मेला हिंदूमहीनेमाघ मेंविशेष रूप से बसंत पंचमी के दिन मनाया जाता है।

लावालौंग मेला झारखंड का सबसेबड़ा पशुमेला हैजो प्रत्येक वर्ष अगहन पूर्णिमा के अवसर पर मनाया जाता है। यह नवंबर या दिसंबर के महीने मेंमनाया जाता है।

भदली मेला - मकर संक्रांति के दिन चतरा जिले के इटखोरी मेंभदली मेला का आयोजन होता है। इटखोरी मेंप्राचीन मंदिर देवी काली और भगवान शिव का हैजहां आदिवासी देवताओं की पूजा करतेहैंऔर उत्सव शुरू करतेहैं।

प्रसिद्ध मेले- प्रतापपुर मेंकुं डा मेला, दुर्गापूजा के दौरान आयोजित चतरा मेला, सिमरिया में टुटिलावा मेला, सिमरिया मेंबेलगाड़ा पशुमेला, चतरा मेंकुं दरी मेला, हंटरगंज मेंकोल्हुआ मेला।

 

कर्नाटक

बनशंकरी मेला देवी बनशंकरी या पार्वती के सम्मान मेंआयोजित किया जाता है।

श्री शिडलिंगप्पा का मेला शिवरात्रि पर मनाया जाता हैऔर देवता को पालकी मेंकई पड़ोसी गांवों के ढोल वादकों(डोलूऔर माजलू) के साथ लेजाया जाता है।

प्रसिद्ध मेला - येलम्मा मेला, गोदाची मेला (कार्तिक माह में, श्री वीरभद्र के सम्मान में आयोजित किया जाता है)

 

मध्य प्रदेश

सिंहस्थ मेला (कुं भ मेला) उज्जैन मेंक्षिप्रा नदी के तट पर आयोजित किया जाता है। यह प्रत्येक बारह वर्ष के अंतराल पर आयोजित किया जाता है।

हीरा भूमियाँका मेला ग्वालियर क्षेत्र मेंअगस्त और सितंबर के महीनेमेंआयोजित किया जाता है। इसका आयोजन हीरामन बाबा की याद में किया जाता है।

देवी जागेश्वरी (जोगेश्वरी) मेला अशोक नगर जिले के चंदेरी मेंआयोजित किया जाता है। यह प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में हौज़ खास तालाब के पास आयोजित किया जाता है।

महामृत्युंजय का मेला प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी और शिवरात्रि पर रीवा जिलेमेंस्थित महामृत्युंजय मंदिर मेंआयोजित किया जाता है।

धामोनी उर्समेलेका आयोजन मस्तान शाह वली की दरगाह पर किया जाता है। इसका आयोजन सागर जिलेके धामोनी मेंकिया जाता है। यह अप्रैल-मई माह मेंआयोजित किया जाता है।

बर्मन का मेला मकर संक्रांति के अवसर पर नरसिंहपुर जिलेमेंनर्मदा नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध रेत घाट पर आयोजित किया जाता है।

कान्हा (काना) बाबा का मेला होशंगाबाद जिले के सोढलपुर नामक गांव मेंकाना बाबा की समाधि पर लगता है।

बाबा शहाबुद्दीन औलिया का उर्सनीमच जिलेमें फरवरी माह मेंकेवल चार दिनोंके लिए आयोजित होता है। यहां बाबा शहाबुद्दीन की मजार है।

मठ घोघरा का मेला सिवनी जिलेके भैरवनाथ नामक स्थान पर शिवरात्रि उत्सव के अवसर पर 15 दिवसीय मठ मेलेका आयोजन किया जाता है।

गोटमार मेला छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्णा में भाद्रपद माह की अमावस्या को सावरगांव के मध्य स्थित जाम नदी के तट पर आयोजित होता है।

ग्वालियर व्यापार मेला भारत का व्यापार मेला है। इसकी शुरुआत 1905 मेंग्वालियर के राजा महाराज माधव राव सिंधिया नेकी थी।

 

पंजाब

 

बाबा सोढल का मेला जालंधर शहर मेंआयोजित किया जाता है। बाबा सोढल का मेला सोढल नाम के एक छोटेलड़के सेजुड़ा है, जिसेबाल-देवता के रूप मेंसम्मान दिया जाता है।

जोर मेला वार्षिक तीन दिवसीय शहीदी जोर मेला साहिबजादा जोरावर सिंह और फतेह सिंह की याद मेंफतेहगढ़ साहिब गुरुद्वारे मेंआयोजित किया जाता है।

माघी दा मेला नानकशाही कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक वर्ष जनवरी या माघ महीनेमेंपवित्र शहर श्री मुक्तसर साहिब मेंआयोजित किया जाता है।

 

राजस्थान

पुष्कर मेला (पुष्कर ऊँट मेला) एक वार्षिक बहु-दिवसीय पशुधन मेला और सांस्कृतिक उत्सव हैजो पुष्कर शहर मेंआयोजित किया जाता है। यह भारत के सबसेबड़ेऊँट, घोड़ेऔर पशुमेलों

मेंसेएक है।

बेणेश्वर मेला डूंगरपुर में शिवरात्रि के समय जनवरी और फरवरी महीनेमेंआयोजित किया जाता है।

कैला देवी मेला कैला गांव मेंअप्रैल और मार्चके महीनों के दौरान आयोजित किया जाता है, यह लगभग एक पखवाड़े तक मनाया जाता है। यह कैला गांव मेंकालीसिल नदी के तट पर आयोजित किया जाता है।

महावीर जी मेला जैनियों के 24वेंतीर्थंकर (संत) श्री महावीर स्वामी की स्मृति का सम्मान करनेके लिए मनाया जाता है।

उर्स मेला महान सूफी संत, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्य तिथि पर आयोजित किया जाता है, यह अजमेर शहर मेंपवित्र संत के स्मारक पर आयोजित किया जाता है।

मल्लीनाथ पशुमेला चैत्र कृष्ण पक्ष के 11वेंदिन लूनी नदी के तट पर बाड़मेर के तिलवाड़ा में आयोजित किया जाता है।

गोमती सागर पशुमेला (झालावाड़) गोमती सागर के तट पर लगता है। यह मलावी नस्ल के जानवरों को खरीदनेके लिए एक लोकप्रिय स्थान है।

झालावाड़ पशुमेला (चंद्रभागा मेला) प्रत्येक वर्ष झालावाड़ जिले में चंद्रभागा नदी के तट पर आयोजित किया जाता है। यह मेला कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। यहां मशहूर मालवा

नस्ल के बैल बेचेऔर खरीदेजातेहैं।

नागौर पशुमेला भारत का दूसरा सबसेबड़ा मेला है, जो प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी महीनेके दौरान आठ दिनोंके लिए आयोजित किया जाता है। वीर तेजाजी पशुमेला (परबतसर)कोलायत पशु मेला (कपिल मुनि मेला) - बीकानेर, दिसंबर माह।

प्रसिद्ध मेले - गोगाजी मेला (गंगानगर जिलेमें गोगामेड़ी), रामदेवरा मेला (जैसलमेर)

 

तमिलनाडु

तिरुवन्नामलाई का पशु मेला यह प्रसिद्ध कार्तिगाई दीपम त्योहार के दौरान आयोजित किया जाता है, जो सबसेव्यस्त मेलोंमेंसेएक है और चार दिनोंतक चलता है।

अन्य मेलें : पर्यटन मेला चेन्नई, मदुरैपुस्तक मेला ।

 

त्रिपुरा

त्रिपुरा का पौष संक्रांति मेला या तीर्थमुख मेला यह जनवरी के मध्य मेंमनाया जाता है, जिसेपौष का महीना माना जाता है। लोग प्रत्येक वर्ष उत्तरायण संक्रांति के अवसर पर गोमती नदी के उद्गम स्थल, जिसेतीर्थमुख के नाम सेजाना जाता है, मेंपवित्र स्नान के लिए एकत्रित होतेहैं।

 

उत्तराखंड

बग्वाल मेला चंपावत जिले के देवीधुरा मेंमां वाराही देवी मंदिर मेंमनाया जाता है।

बग्वाली पोखर मेला कुमाऊं जिलेमेंयम द्वितीया (भाई दूज) पर मनाया जाता है। यह अक्टूबर/नवंबर मेंमनाया जाता है।

दुधियाल देवी मेला प्रत्येक 12 वर्ष मेंटिहरी गढ़वाल जिलेके बूढ़ा केदार क्षेत्र मेंस्थित पौनाड़ा गांव मेंमनाया जाता है।

नंदा देवी मेला प्रत्येक वर्ष सितंबर के महीनेमें कुमाऊं क्षेत्र मेंआयोजित किया जाता है। अल्मोडा वह स्थान हैजहाँमुख्य मेला लगता है।

प्रसिद्ध मेले - पांडुकेश्वर महोत्सव (जांती का मेला), चैती मेला (काशीपुर मेंनवरात्रि के दौरान), पूर्णागिरि मेला (मार्च-अप्रैल के महीने में चैत्र नवरात्रि के दौरान पूर्णागिरि मंदिर में), जौलजीबी मेला (14-21 नवंबर काली और गोरी नदियों के संगम पर), जागेश्वर मेला (बैशाख के महीनेमें), गौचर मेला (14 नवंबर, अलकनंदा नदी के तट पर), हाटकालिका मेला (चैत्र और भादो की अष्टमी पर)

 

उत्तर प्रदेश

कुं भ मेला (पवित्र घड़े का त्योहार) पृथ्वी पर तीर्थयात्रियों की सबसेबड़ी शांतिपूर्ण धार्मिक सभा है, जिसके दौरान प्रतिभागी "शाही स्नान" नाम से स्नान करतेहैंया किसी पवित्र नदी में

डुबकी लगातेहैं। यह प्रत्येक तीन वर्षमेंचार नदी-तटीय तीर्थस्थलों पर बारी-बारी सेआयोजित किया जाता है: इलाहाबाद (गंगा-यमुना-सरस्वती नदियों का संगम), हरिद्वार (गंगा), नासिक

(गोदावरी), और उज्जैन (शिप्रा)। महाकुं भ, जो

प्रत्येक 12 पूर्णकुं भ मेलों अर्थात प्रत्येक 144 वर्ष के बाद होता है।

गौ चारण मेला बृज क्षेत्र के प्रसिद्ध मेलोंमेंसेएक है। कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को मथुरा में इसका आयोजन किया जाता है। इसे'गोपाष्टमी' के नाम सेभी जाना जाता है। इस मेलेमेंगायों की पूजा की जाती है।

नौचंदी मेला होली उत्सव के कुछ दिनों के बाद मेरठ मेंआयोजित किया जाता है। इस मेलेके दौरान, हिंदूभक्त 'नौचंदी देवी' की पूजा करतेहैं और महान संत 'सैयद सालार' को श्रद्धांजलि देते हैं।

देवा शरीफ मेला- यह प्रत्येक वर्ष कार्तिक महीने के दौरान देवा (बाराबंकी जिलेके पास एक स्थान) मेंमहान सूफी संत वारिस अली शाह की दरगाह पर आयोजित किया जाता है।

शाकुम्भरी मेला सहारनपुर मेंवर्ष मेंदो बार नवरात्रि के दौरान आयोजित किया जाता है।

प्रसिद्ध मेला - माघ मेला (इलाहाबाद), रथ मेला (वृंदावन), आगरा पशु मेला या बटेश्वर मेला (आगरा)

 

पश्चिम बंगाल

गंगा सागर मेला पश्चिम बंगाल मेंहुगली नदी के मुहानेपर आयोजित किया जाता है। पश्चिम बंगाल के सागरद्वीप (सागर द्वीप) पर मनायेजानेवाले भारत के कुम्भ मेलेके बाद यह भारत का दूसरा सबसेबड़ा मेला है।

यह मेला जनवरी के महीनेमेंआयोजित होनेवाला छह दिवसीय मेला हैऔर मकर संक्रांति के दिन, तीर्थयात्रियों द्वारा पवित्र जल मेंस्नान करनेऔर पास के प्रसिद्ध कपिल मुनि मंदिर के दर्शन करने की परंपरा निभाई जाती है।

जलपेश मेला जलपाईगुड़ी जिलेके मयनागुड़ी में फरवरी और मार्च के महीनों मेंशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित किया जाता है।