जैन धर्म 2

जैन धर्म

 

SSC Exams

 

 

महावीर नेघर छोड़ दिया और ज्ञान की तलाश में जंगल मेंरहनेलगेथे - तीस वर्षकी आयुमें

 

जैन धर्मके अंतिम और 24वेंतीर्थंकर थे - वर्धमान महावीर  तीर्थंकर और प्रतीक

नंबर

तीर्थंकर

प्रतीक

1

ऋषभनाथ

साँड़

2

अजितनाथ

हाथी

3

सम्भवनाथ

घोड़ा

4

अभिनंदननाथ

बंदर

5

सुमतिनाथ

करलव

6

पद्मप्रभा

लाल कमल

7

सुपार्श्वनाथ

स्वस्तिक

8

चंद्रप्रभा

वर्धमान चाँद

9

पुष्पदंत

डॉल्फिन

10

शीतलनाथ

कल्पवृक्ष

11

श्रेयांसनाथ

गरुड़

12

वासुपूज्य

भैंस

13

विमलनाथ

सूअर

14

अनंतनाथ

भालू

15

धर्मनाथ

वज्र

16

शांतिनाथ

हिरन

17

कुं थुनाथ

बकरी

18

अरनाथ

मछली

19

मल्लिनाथ

कलश

20

मुनिसुव्रत

कछुआ


 

21

नमिनाथ

नीलकमल

22

नेमिनाथ

शंख

23

पार्श्वनाथ

साँप

24

महावीर

शेर

 

जैन धर्मके प्रथम तीर्थंकर थे - ऋषभदेव

वर्धमान महावीर का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व मेंहुआ था - कुं डग्राम, वैशाली (बिहार) में

वर्धमान महावीर संबंधित थे - इक्ष्वाकुवंश से

प्रथम जैन तीर्थंकर ऋषभनाथ का जन्म हुआ था - अयोध्या में

पट्टदकल मेंजैन मंदिर का निर्माण किया गया था - राष्ट्रकूट द्वारा

जैनियोंके अंतिम तीर्थंकर थे - वर्धमान महावीर

महावीर घर छोड़ कर जंगल मेंरहनेचलेगयेथे - 30 वर्षकी आयुमें

भगवान महावीर को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी - पावापुरी में

प्रथम और चतुर्थजैन तीर्थंकर का जन्मस्थान था - अयोध्या

 

Railway Exams

 

जैन धर्ममें 'जैन' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द 'जिन' सेहुई हैजिसका अर्थहोता है - विजेता

जैन धर्मसेसंबंधित जल मंदिर का निर्माण करवाया था - राजा नंदिवर्धन ने

दिगंबर संप्रदाय संबंधित है - जैन धर्मसे

जैन धर्ममेंअहिंसा का वर्णन करनेवाला 'आगम' है - सूत्रक्रतांग सूत्र

जैन धर्मके 24वेंतीर्थंकर थे - वर्धमान महावीर

स्वामी महावीर का जन्म हुआ था  - कुं डग्राम (वैशाली) में

महावीर और उनके अनुयायियोंकी शिक्षाएँ लगभग 1500 वर्षपूर्वलिखी गई थीं  - वल्लभी (गुजरात) में

जैन धर्मके प्रथम तीर्थंकर थे - ऋषभदेव

नवकार मंत्र, सार्वभौमिक प्रार्थना है - जैनियोंकी

जब कोई तीर्थंकर नश्वर शरीर त्यागता हैतो उसे  कहा जाता है - निर्वाण

जैन धर्ममेंकुल तीर्थंकर थे - 24

कन्नड मेंजैन मठवासी प्रतिष्ठानोंको कहा जाता है - बसदी

सम्यक आस्था (सम्यक दर्शन), सम्यक ज्ञान, सम्यक कर्म (सम्यक चरित्र) हैं- जैन धर्मके त्रिरत्न

Police Exams

जैन धर्मके 24वेंतीर्थंकर थे - वर्धमान महावीर

महावीर के पिता सिद्धार्थमुखिया थे  - ज्ञातृक क्षत्रिय कुल के

जैन धर्मके 24वेंऔर अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व हुआ था - बिहार के वैशाली में

दिगंबर (आकाश ही जिसका वस्त्र हो) संप्रदाय और श्वेतांबर (श्वेत वस्त्र धारी) दो संप्रदाय हैं - जैन धर्म

जैन धर्मके 23वेंतीर्थंकर थे - पार्श्वनाथ

जैन संस्थाओंको सौंपी गई भूमिका का वर्णन चोल शिलालेखोंमेंकिया गया है  - पल्लिच्छंदम के रूप में

जैन विद्वान मेरुतुंगा ने 'प्रबंध चिंतामणि' का संकलन किया था - 1304 . में

कल्पसूत्र एक जैन ग्रंथ हैजिसमेंजैन तीर्थंकरोंकी जीवनी है , विशेष रूप से - पार्श्वनाथ और महावीर की

त्रिरत्न (तीन रत्न) दियेगए थे - महावीर द्वारा ⬥ 'सम्यक दर्शन', 'सम्यक ज्ञान' और 'सम्यक चरित्र' त्रिरत्न हैं - जैन धर्मके

जैन गुरुओंया शिक्षकोंको कहा जाता था - तीर्थंकर

अग्नि मंदिर पूजा स्थल हैं - पारसियोंके लिए श्रवणबेलगोला स्थित है - कर्नाटक में

जैन धर्मके प्रथम तीर्थंकर थे - ऋषभनाथ

हथेली पर चक्र के साथ हाथ अहिंसा का प्रतीक है - जैन धर्ममें

Defence Exams

 

महावीर का प्रतीक था - सिंह

जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ का संबंध था - वाराणसी से

पार्श्वनाथ की शिक्षाएँसंगृहीत रूप सेजानी जाती है - चातुर्याम नाम से

अणुव्रत सिद्धांत का प्रतिपादन किया गया था - जैन धर्मद्वारा

⬥'जियो और जीनेदो' का नारा दिया था - महावीर स्वामी ने

प्राचीन भारत मेंएक जैन साधुका जीवन कितनी प्रतिज्ञाओंसेअनुशासित था - पाँच

जैन धर्ममें 'पूर्णज्ञान' के लिए शब्द है - जिन

स्याद्वाद सिद्धान्त है - जैन धर्मका

जैन धर्ममेंकर्मपरमाणुओंके पूर्णविनाश को इंगित करनेकी अवस्था को कहा गया है - निर्जरा

समाधि मरण' संबंधित है - जैन दर्शन से

जैन धर्ममेंउपवास द्वारा प्राण त्याग को कहा जाता है - 'संलेखना '

श्रवणबेलगोला स्थित है - कर्नाटक में

जैन कल्पसूत्र की रचना की थी - भद्रबाहु ने

प्रारंभिक जैन धर्मका इतिहास मिलता है - कल्पसूत्र में

पूर्वधार्मिक ग्रंथ हैं - जैनो के

वह स्थान जहाँअंततः जैन ग्रंथोंका संकलन हुआ था - वल्लभी

प्रारंभिक जैन महाकाव्य लिखेगए थे - अर्धमागधी भाषा में

जैन आगम लिखेगए थे - प्राकृत भाषा में

कुर्चक एक संप्रदाय था - जैन धर्मका

यापनीय संघ का संबंध है - जैन धर्मसे

 

State PCS Exams

 

प्रथम जैन तीर्थंकर, ऋषभनाथ नेनिर्वाण या मोक्ष प्राप्त किया - अष्टापद (कैलाश पर्वत) में

अंतिम जैन तीर्थंकर, महावीर नेनिर्वाण प्राप्त किया - पावापुरी (बिहार) में

जैन तीर्थंकर, नेमिनाथ नेनिर्वाण प्राप्त किया - उर्जयंता (गिरनार पहाड़ी) में

12वेंजैन तीर्थंकर, वासुपूज्य नेनिर्वाण प्राप्त किया - चंपापुरी (भागलपुर, बिहार) में