धार्मिक स्थल 2

धार्मिक स्थल

प्रसिद्ध मंदिर( भारत / विश्व ) आंध्र प्रदेश

भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर (तिरुपति) विष्णु के एक रूप वेंकटेश्वर को समर्पित है, जो द्रविड़ वास्तुकला शैली में निर्मित है। पहली धर्मदाय बंदोबस्त पल्लव रानी समवई द्वारा शुरू की गई थी।

वराह लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर (विशाखापत्तनम) भगवान विष्णुको समर्पित है, जिनकी वहाँवराह नरसिम्हा के रूप मेंपूजा की जाती है। मंदिर का निर्माण कलिंग स्थापत्य शैली मेंकिया गया था। मंदिर का निर्माण नरसिंह देव प्रथम के आदेश पर अक्थायी सेनापति नेकिया था।

श्री मल्लिकार्जुन मंदिर (नंद्याला) श्रीशैलम में स्थित भगवान शिव और पार्वती को समर्पित है। यह मंदिर दूसरी शताब्दी से अस्तित्व में है (सातवाहन राजवंश के शिलालेखीय साक्ष्य)। अधिकांश आधुनिक परिवर्धन विजयनगर साम्राज्य के राजा हरिहर प्रथम के शासनकाल मेंकिए गए थे।

सूर्यनारायण स्वामी मंदिर (श्रीकाकुलम) काकीनाडा जिले के गोलाला ममीदादा गांव में स्थित एक सूर्य मंदिर है। मंदिर की स्थापना श्री कोव्वुरी बासिवी रेड्डी (गोल्लाला ममीदादा के जमींदार) नेकी थी।

रंगनाथ मंदिर (नेल्लोर) मंदिर मेभगवान विष्णु विश्राम अवस्था मेंस्थापित हैजो भगवान रंगनाथ को समर्पित है। प्रत्येक वर्षमार्च-अप्रैल के महीनेमें एक भव्य त्योहार मनाया जाता है।

वीर भद्र मंदिर (अनंतपुर) भगवान शिव के रौद्र अवतार वीरभद्र को समर्पित है। मंदिर की स्थापत्य विशेषताएं विजयनगर शैली मेहैं।

अन्य मंदिर : श्रीकालहस्ती मंदिर (नेल्लोर), श्री भ्रामराम्बा मल्लिकार्जुन मंदिर (नंद्याला), यागंती मंदिर (नंदयाल), अहोबिलम मंदिर (नंदयाल), कनिपकम विनायक मंदिर (चित्तूर), सिंहाचलम मंदिर (विशाखापत्तनम), श्री पद्मावती अम्मावरी मंदिर (तिरुपति)

अरुणाचल प्रदेश

परशुराम कुं ड मंदिर (लोहित) भगवान परशुराम को समर्पित है। यह एक हिंदू तीर्थ स्थल हैजो लोहित नदी की निचली हिस्सेमेंब्रह्मपुत्र पठार पर स्थित है।

आकाशगंगा या मालिनीथान मंदिर (पश्चिम सियांग) देवी दुर्गाको समर्पित हैऔर हिंदूभक्तों के लिए एक तीर्थ स्थान है। यह मंदिर ओडिशा वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करता है। 

 

असम

कामाख्या मंदिर (कामरूप) नीलाचल पहाड़ी पर स्थित हैऔर भारत के 51 शक्तिपीठों मेंसेएक है। यह मंदिर एक वार्षिक उत्सव मेंहजारों तंत्र भक्तों को आकर्षित करता हैजिसेअंबुबाची मेला के नाम सेजाना जाता है।

नेघेरिटिंग शिव डौल (गोलाघाट) मंदिर का निर्माण सबसेपहलेकछारियोंद्वारा किया गया था। मंदिर का वर्तमान स्वरूप अहोम राजा राजेश्वर सिंहा द्वारा बनवाया गया था।

शिव डोल (शिवसागर) संरचनाओं का एक समूह हैजिसमेंतीन हिंदूमंदिर शिव डोल, विष्णुडोल और देवी डोल मंदिर और एक संग्रहालय शामिल है। डोल यात्रा और रथ यात्रा विष्णुडोल मेंमनाए जानेवालेदोनोंवार्षिक त्यौहार हैं।

श्री केदार मंदिर (कामरूप) : अहोम राजा राजेश्वर सिंहा ने इसे भगवान शिव को समर्पित एक उल्लेखनीय मध्यकालीन मंदिर के रूप मेंबनवाया था। यह भगवान शिव के अर्धनारीश्वर (पुरुष और महिला) रूप मेंदुर्लभ स्वयंभू(स्वयं उत्पन्न) लिंगों

मेंसेएक है।

अश्वक्रांता मंदिर (कामरूप) भगवान विष्णुको समर्पित है। "अश्वक्रांता" शब्द का अर्थहै"घोड़ेपर चढ़ना" और इसलिए मंदिर को यह नाम मिला है।

अन्य मंदिर : वशिष्ठ मंदिर (गुवाहाटी), ढेकियाखोवा बोरनामघर (जोरहाट), भैरबी मंदिर (सोनितपुर), उमानंद मंदिर (गुवाहाटी), उग्र तारा मंदिर (कामरूप महानगर), महाभैरव मंदिर (सोनितपुर), ताम्रेस्वेरी मंदिर (तिनसुकिया), नवग्रह मंदिर (गुवाहाटी), दा परबतिया मंदिर (सोनितपुर), सुक्रेश्वर मंदिर (कामरूप), हयग्रीव माधव मंदिर (कामरूप), तिलिंगा मंदिर (तिनसुकिया), महामाया मंदिर (कोकराझार)

 

बिहार

महाबोधि मंदिर (बोधगया): वह स्थान जहाँबुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था (बोधि वृक्ष के नीचे)। यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मेंशामिल है। साइट (स्थान) के कुछ अवयव अशोक के काल के हैं।

विष्णुपद मंदिर (गया) भगवान विष्णुको समर्पित है। वर्तमान संरचना का पुनर्निर्माण देवी अहिल्या बाई होल्कर (इंदौर की शासक) द्वारा किया गया था।

मंगला गौरी मंदिर (गया) : यह मंदिर सती या देवी मां को समर्पित है। मंदिर परिसर मेंमाँकाली, भगवान गणेश, भगवान हनुमान और भगवान शिव के मंदिर शामिल हैं।

मिथिला शक्ति पीठ (दरभंगा): इस मंदिर मेंदेवी उमा और भगवान महोदर की मूर्ति स्थित है (शक्ति को 'उमा' या 'महादेवी' और भैरव को 'महोदर' के रूप मेंपूजा जाता है)

अन्य मंदिर: सुंदरनाथ मंदिर (अररिया), बूढ़ानाथ

मंदिर (भागलपुर), श्री आदिनाथ अखाड़ा (बक्सर), मिट्ठेश्वरनाथ शिव मंदिर (दरभंगा), चौमुखी महादेव (वैशाली), मुंडेश्वरी मंदिर (कैमूर), सीता कुं ड (सीतामढ़ी), विष्णुधाम मंदिर ( सीवान)

 

छत्तीसगढ़

मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर (राजनांदगांव) को बड़ी बम्बलेश्वरी के नाम सेजाना जाता है। यहाँनवरात्रि के दौरान ज्योति कलश जलानेकी परंपरा है।

महामाया मंदिर (बिलासपुर) देवी दुर्गा और महालक्ष्मी को समर्पित है। इसका निर्माण रत्नापुरा के कलचुरियों के शासनकाल के दौरान किया गया था।

चंद्रहासिनी देवी मंदिर (जांजगीर-चांपा) महानदी के निर्मल तट पर स्थित है। यह प्रत्येक वर्षंनवरात्रि के त्योहार का आयोजन करता है। इसेशक्ति तीर्थ के रूप मेंमाना जाता है।

भोरमदेव मंदिर (कबीरधाम) भोरमदेव मेंभगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण फनीनागवंशी राजवंश के लक्ष्मण देव राय और गोपाल देव द्वारा किया गया था।

दंतेश्वरी मंदिर (बस्तर) देवी दंतेश्वरी को समर्पित है। यहाँनवरात्रि के दौरान ज्योति कलश जलाने की भी परंपरा है।

अन्य मंदिर - बंजारी माता मंदिर (रायपुर), जतमई घटारानी (गरियाबंद), शिवानी मां मंदिर (कांकेर), पाताल भैरवी मंदिर (राजनांदगांव), भोरमदेव मंदिर, हाटकेश्वर मंदिर (रायपुर), गंगा मैया मंदिर (बालोद)

 

गोवा

शांता दुर्गामंदिर (पोंडा):- यह शांतादुर्गा(विष्णु और शिव के बीच मध्यस्थता करनेवाली देवी) को समर्पित है। वर्तमान मंदिर का निर्माण सतारा के मराठा सम्राट छत्रपति शाहू महाराज के शासनकाल के दौरान किया गया था।

मंगेशी मंदिर (उत्तरी गोवा):- यह शिव के अवतार भगवान मंगेश को समर्पित है। में

महालक्ष्मी मंदिर (उत्तरी गोवा): यह देवी महालक्ष्मी (धन की हिंदूदेवी) को समर्पित है। यह पहला हिंदू मंदिर था जिसे 300 वर्षों के कड़े विरोध के बाद पुर्तगालियों नेगोवा मेंबनानेकी अनुमति दी थी।

महादेव मंदिर (तांबडी सुरला): यह भगवान शिव को समर्पित है। यह भगवान महावीर अभयारण्य मेंहरे-भरेपश्चिमी घाटों के बीच स्थित एक छिपा हुआ रत्न है।

श्री नागेश महारुद्र मंदिर (बंदोरा): यह भगवान नागेश (शिव) को समर्पित हैऔर अपनेजीवंत वार्षिक उत्सवमहाशिवरात्रिके लिए प्रसिद्ध है

अन्य मंदिर - श्री सप्तकोटेश्वर मंदिर (उत्तरी गोवा),

मारुति मंदिर (फोंटेनहास), श्री दामोदर मंदिर (दक्षिणी गोवा), महालसा मंदिर (पोंडा), श्री नागेश मंदिर (पोंडा)

 

गुजरात

सोमनाथ मंदिर (गिर सोमनाथ): यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों मेंसे एक है। वर्तमान मे सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हिंदू मंदिर वास्तुकला की मारू-गुर्जर शैली मेंकिया गया था।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर (गांधीनगर): योगीजी महाराज (स्वामीनारायण के चौथे आध्यात्मिक उत्तराधिकारी) सेप्रेरित एक बड़ा हिंदू मंदिर परिसर है।

द्वारकाधीश मंदिर (द्वारका): यह भगवान कृष्ण को समर्पित है। यह चार धाम के स्थलों मेंसेएक है। इसका पुनर्निर्माण मारू-गुर्जर शैली मेंकिया गया था।

सूर्यमंदिर (मोढेरा): यह सूर्यदेवता को समर्पित है। इसका निर्माण चालुक्य वंश के भीम-प्रथम के शासनकाल के दौरान किया गया था।

रुक्मिणी मंदिर (द्वारका): यह हिंदूदेवी रुक्मिणी (भगवान कृष्ण की मुख्य रानी, प्रिय पत्नी और द्वापर युग मेंदेवी लक्ष्मी का अवतार) को समर्पित है।

अन्य मंदिर - स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर (गांधीनगर), श्री शत्रुंजय मंदिर (पालिताना), नीलकं ठ धाम स्वामी नारायण मंदिर (पोइचा), संदीपनी मंदिर (पोइचा)

 

हरियाणा

शीतला माता मंदिर (गुरुग्राम): यह मंदिर देवी शीतला को समर्पित है। यह मंदिर गुरु द्रोणाचार्य की पत्नी कृपी (किरपई) को समर्पित है, जिन्हें ललिता भी कहा जाता है।

सीता माई मंदिर (करनाल): यह देवी सीता को समर्पित है।

भूतेश्वर मंदिर (जींद): यह मंदिर भूतेश्वर (शिव का एक स्वरूप) को समर्पित है।

गीता मंदिर (कैथल): यहाँभगवती देवी और गौरी शंकर की मूर्तिस्थापित है।

चिट्टा मंदिर (यमुनानगर): यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है।

माता मनसा देवी मंदिर (पंचकूला): यह मंदिर देवी मनसा देवी (शक्ति का एक रूप) को समर्पित है।

चंडी मंदिर (पंचकूला): यह शक्ति की देवी चंडी को समर्पित है। यह चंडीमंदिर छावनी मेंस्थित है जो भारतीय सेना की पश्चिमी कमान का घर है।

अन्य मंदिर - भद्रकाली मंदिर (कुरुक्षेत्र), शिव मंदिर (बाघोट), स्थानेश्वर महादेव मंदिर (कुरुक्षेत्र), बिड़ला मंदिर (थानेसर), पंचवटी मंदिर (पलवल)

 

हिमाचल प्रदेश

बज्रेश्वरी मंदिर (कांगड़ा): यह बज्रेश्वरी देवी (देवी दुर्गा का एक रूप) को समर्पित है। ऐसा माना जाता हैकि मूल मंदिर का निर्माण महाभारत के समय पांडवोंद्वारा किया गया था।

बैजनाथ मंदिर (कांगड़ा): यह नागर शैली का हिंदूमंदिर है, जो वैद्यनाथ के रूप मेंभगवान शिव को समर्पित है।

ज्वालामुखी देवी मंदिर (कांगड़ा): देवी ज्वालामुखी का एक प्रसिद्ध मंदिर, जिसेदेवी आदि पराशक्ति (दुर्गाया काली) का अवतार माना जाता है।

श्री चामुंडा देवी मंदिर (कांगड़ा): यह श्री चामुंडा देवी (देवी दुर्गाका एक रूप) को समर्पित है।

अन्य मंदिर: नैना देवी मंदिर (बिलासपुर), ज्वाला देवी मंदिर (कांगड़ा), माता चिंतपूर्णी देवी मंदिर (ऊना), बिजली महादेव मंदिर (कुल्लू), झाकू मंदिर (शिमला)

 

झारखंड

बैद्यनाथ मंदिर (देवघर): यह भगवान शिव को समर्पित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों मेंसेएक है। इसकी स्थापना राजा पूरन माल के द्वारा किया गया था।

मालुती मंदिर (दुमका): इन मंदिरों मेंपूजेजाने वालेदेवताओं मेंसंरक्षक देवता मौलक्षी, भगवान शिव, विष्णु , देवी काली और दुर्गाहैं।

जगन्‍नाथ मंदिर (रांची): इसका निर्माण बड़कागढ़ जगन्‍नाथपुर के राजा ठाकुर अनी नाथ शाहदेव के द्वारा किया गया था, जो भगवान जगन्‍नाथ को समर्पित है।

छिन्नमस्ता मंदिर (रामगढ़): देवी छिन्नमस्ता की मूर्ति जो कमल शय्या पर कामदेव और रति के शरीर पर खड़ी है।

अन्य मंदिर - श्री श्री कालिका महारानी मंदिर (बोकारो), हरिहर धाम (गिरिडीह), झारखंड धाम (धनवार), देवरी मंदिर (रांची), नौलखा मंदिर (देवघर)

 

कर्नाटक

उडुपी श्री कृष्ण मंदिर (उडुपी): यह भगवान कृष्ण और द्वैत मठ को समर्पित है। इसकी स्थापना वैष्णव संत जगद्गुरु श्री माधवाचार्यनेकी थी।

विद्याशंकर मंदिर (चिकमगलूर): यह श्रीशारदा का प्राचीन मंदिर है। इसेगुरु विद्याशंकर की स्मृति मेंबनवाया गया था।

विट्ठल मंदिर (हम्पी): एक यूनेस्को विश्व धरोहर

स्थल मेशामिल हैजो भगवान विष्णुको समर्पित है।

चेन्नाकेशव मंदिर (हसन): यह मंदिर भगवान चेन्नाकेशव (भगवान विष्णु का एक रूप) को समर्पित है, जिसका निर्माण राजा विष्णुवर्धन के द्वारा किया गया था।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर (कोलार): यह मंदिर विश्व के सबसेबड़ेशिवलिंगोंमेंसेएक है।

अन्य मंदिर - मुरुदेश्वर शिव मंदिर (भटकल), महाबलेश्वर मंदिर (गोकर्ण), मल्लिकार्जुन मंदिर (पट्टडकल), केदारेश्वर मंदिर (बल्लीगावी), विरुपाक्ष मंदिर (हम्पी)

 

केरल

सबरीमाला मंदिर (पठानमथिट्टा): यह मंदिर अय्यप्पन नाम के एक हिंदू ब्रह्मचारी देवता को समर्पित है, जिन्हेंधर्मशास्ता के नाम सेभी जाना जाता है। मंदिर केवल मंडला पूजा के दिनोंमेंपूजा के लिए खुला रहता है।

अट्टुकल भगवती मंदिर (अट्टुकल): देवी कन्नकी (भद्रकाली) इस मंदिर की मुख्य देवी हैं। यह मंदिर वार्षिक अट्टुकल पोंगल उत्सव के लिए प्रसिद्ध है।

श्री कृष्ण मंदिर (अंबालापुझा): यह भगवान कृष्ण को समर्पित है, भक्त यहाँउन्नी कृष्ण (भगवान कृष्ण के बाल अवस्था) की पूजा करनेआतेहैं।

चोट्टानिक्करा मंदिर (एर्नाकुलम): यह मंदिर हिंदू देवी मां भगवती को समर्पित है।

गुरुवायुर मंदिर (त्रिशूर): गुरुवायुरप्पन (विष्णुका एक रूप) को समर्पित है।

अन्य मंदिर - श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (तिरुवनंतपुरम), अट्टुकल भगवती मंदिर (तिरुवनंतपुरम), एट्टुमानूर महादेव मंदिर (कोट्टायम), थिरुनेल्ली मंदिर (वायनाड घाटी), ताली मंदिर (कोझिकोड)

 

मध्य प्रदेश

विराटेश्वर मंदिर (शहडोल): यह भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण कल्चुरी शासक महाराजा युवराजदेव द्वितीय के द्वारा किया गया था।

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन): यह मंदिर शिव को समर्पित हैऔर पवित्र शिप्रा नदी के किनारेस्थित बारह ज्योतिर्लिंगोंमेंसेएक है।

ओंकारेश्वर मंदिर (खंडवा): यह मंदिर शिव को समर्पित है। यह मंदिर मांधाता (शिवपुरी) द्वीप पर नर्मदा और कावेरी नदी के तट पर स्थित है।

राम-जनार्दन मंदिर (उज्जैन): यह श्री राम और जनार्दन (विष्णु) का मंदिर है। इसका निर्माण मिर्जा राजा जयसिंह के द्वारा किया गया था।

अन्य मंदिर - कं दरिया महादेव मंदिर (खजुराहो), आदिनाथ मंदिर (खजुराहो), काल भैरव मंदिर (उज्जैन), मतंगेश्वर मंदिर (खजुराहो), गौरी सोमनाथ मंदिर (ओंकारेश्वर)

 

महाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर (संभाजी नगर): यह भगवान शिव शंकर का एक ज्योतिर्लिंग मंदिर है। यह विश्व के 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरोंमेंसेएक है।

यमाई देवी मंदिर (सतारा): यह मंदिर यमाई देवी को समर्पित है।

मोरेश्वर मंदिर (पुणे): यह गणेश (बुद्धि के देवता) को समर्पित है।

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक): यह हिंदू भगवान शिव को समर्पित है और बारह ज्योतिर्लिंगोंमेंसेएक है।

चिंतामणि मंदिर (पुणे): यह मंदिर गाणपत्य संप्रदाय के अनुसार सर्वोच्च देवता गणेश को समर्पित है।

अन्य मंदिर - शिरडी साईं मन्दिर, शनि शिंगणापुर (अहमदनगर), भीमाशंकर मंदिर (पुणे), सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई), हरिहरेश्वर मंदिर (रायगढ़), वाल्केश्वर मंदिर (मुंबई)

 

मणिपुर

महाबली मंदिर (इम्फाल): यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है। मंदिर का निर्माण झोपड़ीनुमा बंगाल शैली मेंकिया गया है।

श्री गोविंदजी मंदिर (इम्फाल): यह मंदिर हिंदू देवता राधा कृष्ण (गोविंदजी) को समर्पित है। इसका निर्माण मूल रूप सेमहाराजा नारा सिंह के शासनकाल के दौरान किया गया था।

सनामाही मंदिर (इम्फाल पश्चिम): यह लैनिंगथौ सनामाही (सनमाही धर्म के सर्वोच्च देवता) का मंदिर है। इसे गॉथिक शैली मेंबनाया गया है (संरचना अष्टकोणीय आधार पर बनाई गई है)

जोरेबंगला मंदिर (बिष्णुपुर): यह मंदिर भगवान विष्णुया भगवान कृष्ण को समर्पित है।

अन्य मंदिर - श्री गोविंदजी मंदिर (इम्फाल), गोपीनाथ मंदिर (निंगथौखोंग)

 

मेघालय

मौसिनराम मंदिर (मौसिनराम): यह मंदिर एक गुफा मेंस्थित हैजो भगवान शिव को समर्पित है। यह अपनेप्राकृतिक रूप सेबनेस्तंभ सेनिर्मित शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है।

नर्तियांग दुर्गामंदिर (पश्चिम जैंतिया हिल्स): यह 51 शक्तिपीठों मेंसेएक हैऔर हिंदू धर्म के शक्तिवाद संप्रदाय के भक्तोंके लिए सबसेपवित्र स्थलोंमेंसेएक है। 
 

महादेव खोला धाम (शिलांग): महादेव खोला धाम भगवान शिव को समर्पित एक गुफा मंदिर है। प्रत्येक वर्षमहा शिवरात्रि के अवसर पर तीन दिनों तक भगवान शिव का भव्य मेला आयोजित किया जाता है।

मातृ मंदिर (शिलांग): देवी काली को समर्पित मंदिर को रमना कालीबाड़ी के नाम सेभी जाना जाता है। मंदिर की वास्तुकला शिखर जैसी है।

 

मिजोरम

सोलोमन मंदिर (आइजोल): इस मंदिर का निर्माण धार्मिक समूह कोहरान थियांघलिम (पवित्र चर्च) द्वारा किया गया था।

 

नागालैंड

कालीबाड़ी मंदिर (दीमापुर) - यह मंदिर देवी काली को समर्पित है।

 

ओडिशा

जगन्‍नाथ मंदिर (पुरी): यह मंदिर जगन्‍नाथ (विष्‍णु का एक रूप) को समर्पित है। पुरी-मंदिर अपनी वार्षिक रथ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। यह चार धाम तीर्थ स्थलों मेंसे एक है। इसका निर्माण गंग राजवंश के एक प्रसिद्ध राजा (अनंत वर्मन चोडगंग देव) के द्वारा किया गया था। यह कलिंग शैली की वास्तुकला का एक उदाहरण है, जिसे भारत के 'व्हाइट पैगोडा' के रूप मेंभी जाना जाता है।

सूर्यमंदिर (कोणार्क): इस मंदिर का श्रेय ओडिशा वास्तुकला शैली (कलिंग वास्तुकला) में राजा नरसिम्हादेव-प्रथम (पूर्वी गंगा राजवंश) को दिया जाता हैऔर यह हिंदूसूर्यभगवान को समर्पित है। इस मंदिर को "ब्लैक पैगोडा" कहा जाता है।

लिंगराज मंदिर (भुवनेश्वर): यह शिव को समर्पित एक हिंदूमंदिर है। इसका निर्माण राजा जजाति केशरी के प्रयासों सेकिया गया था और राजा लालतेन्दुकेशरी के शासनकाल के दौरान समाप्त हो गया था। यह मंदिर देउला शैली मेंबनाया गया था।

राजरानी मंदिर (भुवनेश्वर): इसेस्थानीय रूप से "प्रेम मंदिर" के रूप मेंजाना जाता है। इसका निर्माण पंचरथ शैली मेंहुआ है, जिसेसोमवमसी राजाओंनेबनवाया था।

मुक्तेश्वर मंदिर (खुर्दा): यह "ओडिशा वास्तुकला का रत्न" या "कलिंग वास्तुकला" है। यह कलिंग शैली की वास्तुकला मेंशिव को समर्पित है।

अन्य मंदिर - चौसठ योगिनी मंदिर (हीरापुर), अनंत वासुदेव मंदिर (भुवनेश्वर), गुंडिचा मंदिर (पुरी), तारा तारिणी मंदिर (गंजाम), मौसी मां मंदिर (पुरी)

 

पंजाब

स्वर्णमंदिर (हरिमंदिर साहिब): यह अमृतसर शहर मेंस्थित एक गुरुद्वारा है। स्वर्णमंदिर का डिजाइन और निर्माण गुरु अर्जुन देव (पांचवेंसिख गुरु) के द्वारा किया गया था।

दुर्गियाना मंदिर (अमृतसर): इस मंदिर मे देवी लक्ष्मी और विष्णुकी पूजा होती हैं। इसका निर्माण गुरु हरसाई मल कपूर नेसिख श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्णमंदिर) की स्थापत्य शैली मेंकिया था।

अन्य मंदिर - श्री कृष्ण मंदिर (लुधियाना), मुक्तेश्वर महादेव मंदिर (डूंग), काली माता मंदिर (पटियाला)

 

राजस्थान

ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर) (जगतपिता ब्रह्मा मंदिर): यह हिंदूनिर्माता-भगवान ब्रह्मा को समर्पित है।

दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू): यह पार्श्वनाथ को समर्पित हैऔर इसेसांगवी मांडलिक और उनके परिवार द्वारा निर्माण किया गया था। यह माउंट आबूपर स्थित एक प्रसिद्ध जैन तीर्थस्थल है।

श्रीनाथजी मंदिर (नाथद्वारा): यह वल्लभ संप्रदाय या वल्लभ आचार्य द्वारा स्थापित शुद्धाद्वैत से संबंधित एक वैष्णव मंदिर है।

खाटूश्याम मंदिर (सीकर): यह भगवान कृष्ण और बर्बरीक की पूजा के लिए एक तीर्थस्थल है, जिसेअक्सर कुलदेवता के रूप मेंपूजा जाता है।

अन्य मंदिर: एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर), अंबिका माता मंदिर (जगत), करणी माता मंदिर (देशनोक), बालाजी मंदिर (सालासर), मेहंदीपुर बालाजी मंदिर (करौली)

 

सिक्किम

किरातेश्वर महादेव मंदिर (ग्यालशिंग): यह मंदिर शिव को समर्पित है। यहाँबाला चतुर्दशी और महा शिवरात्रि त्यौहारो का आयोजन किया जाता हैं।

सोलोफोक चारधाम (दक्षिण सिक्किम): यहाँ भगवान शिव की 26½ मीटर ऊँची प्रतिमा हैऔर चारों धामों के साथ बारह ज्योतिर्लिंगों की प्रतिकृतियां हैं; इस परिसर मेंबद्रीनाथ, जगन्नाथ, द्वारका और रामेश्वरम भी स्थापित हैं।

हनुमान टोक (गंगटोक): यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है, और इसका रखरखाव भारतीय सेना द्वारा किया जाता है।

विश्व विनायक मंदिर (रेशी): हाथी के सिर वाले भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदूमंदिर है, और मंदिर मेंएक शिवलिंग और एक हनुमान प्रतिमा भी है।

बाबा हरभजन सिंह मंदिर (पूर्वी सिक्किम): वह एक भारतीय सेना के सिपाही थे। कहा जाता हैकि उन्होंनेअपनी मृत्युके बाद भी सैनिकोंके सपनोंमें आकर और उन्हेंअपनेदुश्मनों की योजनाओंको बताकर भारतीय सेना की सेवा की है।

 

तमिलनाडु

ब्रह्मपुरेश्वर मंदिर (त्रिची): यह त्रिची के पास थिरुपत्तूर मेंस्थित है, जो ब्रह्मा और शिव को समर्पित है।

मीनाक्षी मंदिर (मदुरै): यह देवी मीनाक्षी (शक्ति का एक रूप) और उनके पति सुंदरेश्वर (शिव का एक रूप) को समर्पित है। यह मंदिरों के शहर मदुरैमें स्थित है।

शोर मंदिर: यह महाबलीपुरम मेंस्मारकों के समूह मेंसेएक है, इसे1984 सेयूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप मेंवर्गीकृत किया गया है। इस परिसर मेंतीन अलग-अलग मंदिर हैं: दो भगवान शिव को समर्पित हैं, और एक भगवान विष्णुको समर्पित है।

बृहदीश्वर मंदिर (तंजावुर): यह चोल स्थापत्य शैली मेंनिर्मित है, इसेचोल सम्राट राजराज-प्रथम द्वारा निर्माण किया गया था और यह मंदिर शिव को समर्पित है।

कैलाशनाथ मंदिर (कांचीपुरम): यह कांचीपुरम मेंएक पल्लव-युग का ऐतिहासिक हिंदूमंदिर है, जो शिव को समर्पित है। यह द्रविड़ वास्तुकला को दर्शाता है।

अन्य मंदिर - रामनाथस्वामी मंदिर (रामनाथपुरम), ऐरावतेश्वर मंदिर (कुं भकोणम), सुचिन्द्रम मंदिर (कन्याकुमारी), कपालेश्वर मंदिर (चेन्नई), नागराज मंदिर (नागरकोइल)

 

तेलंगाना

रामप्पा मंदिर (मुलुगु): यह काकतीय शैली का हिंदूमंदिर हैजो हिंदूभगवान शिव को समर्पित है। इसे2021 मेंयूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मेशामिल किया गया था।

हजार स्तंभ मंदिर (हनमकोंडा): यह भगवान शिव, विष्णु और सूर्य को समर्पित है। इसका निर्माण राजा रूद्र देव के काल मेंहुआ था।

पद्माक्षी मंदिर (हनमकोंडा): यह हिंदूदेवी पद्माक्षी (लक्ष्मी) को समर्पित है, और इसमेंजैन चित्रण भी शामिल है।

श्री लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर (यदाद्रि): यह भगवान विष्णुके अवतार भगवान लक्ष्मी नरसिम्हा को समर्पित एक छोटा मंदिर है।

अन्य मंदिर - चिलकुर बालाजी मंदिर (हैदराबाद), ज्ञान सरस्वती मंदिर (आदिलाबाद), सांघी मंदिर (हैदराबाद), कर्मघाट हनुमान मंदिर (चंपापेट), भद्रकाली मंदिर (वारंगल)

 

त्रिपुरा

त्रिपुरसुंदरी मंदिर (माताबारी, उदयपुर): देवी त्रिपुर सुंदरी (देवी त्रिपुरेश्वरी) का एक हिंदूमंदिर है। इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों मेंसेएक माना जाता है। 


 

भुवनेश्वरी मंदिर (राजनगर): यह मंदिर बंगाल की चारचला-शैली की वास्तुकला को दर्शाता है। इस मंदिर का उल्लेख रवीन्द्रनाथ टैगोर की कृतियोंमें किया गया है।

सबा काली मंदिर (सिपाहिजाला): इसेमहाराजा धन्य माणिक्य नेएक पहाड़ी की चोटी पर बनवाया था, जो मां काली को समर्पित है।

चतुर्दश देवता मंदिर (पश्चिम त्रिपुरा): यह मंदिर त्रिपुरा के राजा कृष्ण माणिक्य द्वारा चौदह देवताओं (खार्ची पूजा के दौरान पूजेजानेवाले) के सम्मान मेंबनवाया गया था, जिन्हेंचतुर्दश देवता कहा जाता है।

 

उत्तर प्रदेश

काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी): यह मंदिर शिव को समर्पित है, और बारह ज्योतिर्लिंगों मेंसे एक है।

राम जन्मभूमि (अयोध्या): यहाँराम (हिंदूदेवता विष्णुके सातवेंअवतार) का जन्मस्थान है।

हनुमान गढ़ी (अयोध्या): यह मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित है।

श्री गोरखनाथ मंदिर (गोरखपुर): गोरखनाथ नाम मध्यकालीन संत गोरक्षनाथ के नाम पर पड़ा है, जो गोरखपुर मेंस्थित हैं।

अन्य मंदिर - श्री कृष्ण जन्मभूमि (मथुरा), द्वारकाधीश मंदिर (मथुरा), सारनाथ मंदिर (वाराणसी), मां विंध्यवासिनी मंदिर (विंध्याचल), श्री बांके बिहारी मंदिर (वृंदावन)

 

उत्तराखंड

केदारनाथ मंदिर (रुद्रप्रयाग): यह गढ़वाल हिमालय श्रृंखला पर स्थित शिव के बारह ज्योतिर्लिंगोंमेंसेएक है।

गंगोत्री मंदिर (उत्तरकाशी): यह पवित्र शिला या "भागीरथ शिला" के निकट स्थित हैजहां राजा भागीरथ नेभगवान शिव की पूजा की थी, जिसे गोरखा जनरल अमर सिंह थापा के द्वारा निर्माण

किया गया था।

हर की पौड़ी (हरिद्वार): इसका अर्थहै"हरि यानी नारायण के चरण"। हर की पौड़ी या ब्रह्मकुं ड पवित्र शहर हरिद्वार का मुख्य घाट है।

यमुनोत्री मंदिर (उत्तरकाशी): यह मंदिर देवी यमुना को समर्पित है। यह मंदिर प्रतिष्ठित चारधाम तीर्थयात्रा परिपथ का हिस्सा है।

नीलकं ठ महादेव मंदिर (ऋषिकेश): यह भगवान शिव के अंश नीलकं ठ को समर्पित है। मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली सेबहुत प्रभावित है।

माँनैना देवी मंदिर (नैनीताल): यह नैनीताल में स्थित है। यहाँ सती के शक्ति रूप की पूजा की जाती है।

अन्य मंदिर - कोटेश्वर महादेव मंदिर (रुद्रप्रयाग), कैंची धाम मंदिर (नैनीताल), मध्यमहेश्वर मंदिर (गढ़वाल), रुद्रनाथ मंदिर (चमोली), कार्तिक स्वामी मंदिर (रुद्रप्रयाग)

 

पश्चिम बंगाल

कालीघाट काली मंदिर (कोलकाता): यह मंदिर हिंदू देवी काली को समर्पित है। यह आदि गंगा नामक एक छोटी नहर के तट पर स्थित शक्तिपीठोंमेंसेएक हैजो हुगली सेजुड़ती है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर (कोलकाता): यह मंदिर रानी रशमोनी द्वारा बनवाया गया था और यह देवी काली को समर्पित है।

अन्य मंदिर - तारकनाथ मंदिर (हुगली), चीनी काली मंदिर (टंगरा), बेलूर मठ (बेलूर), तारकनाथ मंदिर (तारकेश्वर)

 

जम्मू एवं कश्मीर

अमरनाथ मंदिर (अनंतनाग): यह मंदिर शिव को समर्पित है। यह मंदिर 'शिव-लिंगम' (जुलाई/अगस्त के महीने में बर्फ का एक प्राकृतिक निर्माण) के लिए प्रसिद्ध है, जिसके बारे मेंमाना जाता हैकि यह चंद्रमा के परिक्रमा के अनुसार घटता-बढ़ता है।

वैष्णो देवी मंदिर (रियासी): तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद भारत का दूसरा सबसेअधिक देखा जानेवाला धार्मिक मंदिर है। यह मंदिर माता रानी या वैष्णवी को समर्पित है।

शंकराचार्यमंदिर (श्रीनगर): यह प्राचीन कश्मीरी वास्तुकला को प्रदर्शित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भगवान शिव को समर्पित है।

रघुनाथ मंदिर (जम्मू): यह मंदिर भगवान राम को समर्पित हैऔर सात मंदिरों वाला जम्मूके मध्य में एक दिव्य स्थान है।

मार्तंड सूर्यमंदिर (अनंतनाग): यह हिंदूधर्मके प्रमुख सौर देवता सूर्यको समर्पित था। यह शारदा पीठ और अमरनाथ मंदिर के साथ-साथ कश्मीरी पंडितों के तीन सबसेपवित्र तीर्थस्थलों मेंसेएक

है।

 

लद्दाख

मंजुश्री मंदिर (अलची): इसे'जंपेल्हा खांग' भी कहा जाता है।

वज्रभैरव तीर्थ(स्पितुक): यह मंदिर स्पितुक की सबसेपुरानी संरचनाओंमेंसेएक माना जाता है।

सेरज़ांग मंदिर (लेह): इस मंदिर की दीवारेंबुद्ध की आकृतियों के साथ-साथ रेड हैट संप्रदाय के लोगों की आकृती सेसुशोभित हैं। यह तिलोपा, मारपा, मिला रास्पा और नारोपा जैसेभित्ति चित्रों का घर है।

लामोखांग मंदिर (थिकसे): यह तिब्बती बौद्ध धर्म

के गेलुग स्कूल सेसंबद्ध एक बौद्ध मठ है, और मध्य लद्दाख मेंसबसेबड़ा मठ है।

माथो मंदिर (लेह): इसकी स्थापना मूल रूप से लामा दुग्पा दोर्जेनेकी थी, यहाँका मठ सस्किया ऑर्डर सेसंबंधित है।

 

पुदुचेरी

अरुलमिगु मनकुला विनयगर: यह भगवान गणेश को समर्पित है।

श्री गोकिलाम्बल थिरुकामेश्वर मंदिर: यह मंदिर इष्टदेव भगवान शिव को समर्पित हैं, जिनकी पूजा थिरुकामेश्वर (शिव लिंग) के रूप मेंकी जाती है।

श्री कृष्ण मंदिर: यह मंदिर मिनिकॉय (मलिकु) में स्थित हैऔर भगवान कृष्ण को समर्पित है।

 

दिल्ली

लोटस टेम्पल (नई दिल्ली): यह एक बहाई हाउस ऑफ उपासना है जिसका उदघाटन दिसंबर 1986 मेंकिया गया था। यह अपनेकमल जैसी आकृति के लिए उल्लेखनीय है।

छतरपुर मंदिर (दिल्ली): यह मंदिर देवी कात्यायनी (दुर्गा) को समर्पित है। यह मंदिर भारत का दूसरा और दुनिया का तीसरा सबसेबड़ा मंदिर माना जाता था।

कालकाजी मंदिर (नई दिल्ली): यह मंदिर हिंदू देवी काली को समर्पित है।

स्वामीनारायण अक्षरधाम (दिल्ली): यह योगीजी महाराज सेप्रेरित और प्रमुख स्वामी महाराज द्वारा निर्माण किया गया है। देवता - स्वामीनारायण, सीता-राम, राधा-कृष्ण, शिव-पार्वती और लक्ष्मी-नारायण।

गौरी शंकर मंदिर (चांदनी चौक): इस मंदिर के अंदर भगवान शिव की विशाल मूर्तिस्थापित है।

 

दादरा और नगर हवेली एवंदमन और दीव

ओम मंदिर (सिलवासा): यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैऔर इस क्षेत्र के सबसेमहत्वपूर्ण हिंदूमंदिरोंमेंसेएक माना जाता है।

बिंद्राबिन मंदिर (खडोली): यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। दीवारों पर की गई नक्काशी समृद्ध भारतीय संस्कृतियों और उनकी परंपराओंको दर्शाती है।

 

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

श्री वेत्रिमलाई मुरुगन मंदिर (पोर्ट ब्लेयर): यह पोर्ट ब्लेयर में स्थित हिंदू देवता मुरुगन को समर्पित है।

शिव मंदिर (पोर्टब्लेयर):यह भगवान शिव (विनाशक और परिवर्तक) को समर्पित है।

 

विश्व के प्रसिद्ध मंदिर

स्वामीनारायण अक्षरधाम: संयुक्त राज्य अमेरिका मेंसबसेबड़ा हिंदूमंदिर (न्यूजर्सी)

अंकोरवाट, कं बोडिया: दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्मारकों मेंसेएक है। इसे12वींशताब्दी मेंखमेर राजा सूर्यवर्मन द्वितीय नेबनवाया था।

श्री सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, मलेशिया: बट्टू गुफाओं के प्रवेश द्वार पर स्थित भगवान मुरुगन की मूर्ति को दुनिया मेंउनकी सबसेऊं ची मूर्ति माना जाता है।

अरुल्मिगुश्री राजकलीअम्मन ग्लास मंदिर: यह मलेशिया में स्थित कांच से बना दुनिया का एकमात्र हिंदूमंदिर है।

श्री शिव सुब्रमण्यम मंदिर: फिजी के नाडी मेंएक द्रविड़ शैली का हिंदूमंदिर है। यह प्रशांत क्षेत्र का सबसेबड़ा हिंदूमंदिर है।

तनाह लोट मंदिर: सात समुद्र तटीय मंदिरोंमेंसे एक, प्रत्येक मंदिर अगलेके साथ पंक्तिबद्ध हैऔर इंडोनेशिया के बाली के तट पर एक लंबी श्रृंखला में है। इसमेंप्राचीन बालीनी पौराणिक कथाएँ संग्रहीत हैं।

श्री वेंकटेश्वर बालाजी मंदिर: यूरोप मेंभगवान वेंकटेश्वर का पहला मंदिर है। इस मंदिर का उद्घाटन 23 अगस्त 2006 को हुआ था। यहां भगवान विष्णुकी मूर्तिलगभग 12 फीट ऊं ची है।

श्री स्वामीनारायण मंदिर, लंदन: इसका उद्घाटन 1995 मेंहुआ था। मंदिर के निर्माण में उपयोग किए गए पत्थरों का प्रयोग इसके पहले किसी भी हिंदूमंदिर के निर्माण मेंनहींकिया गया था।

गणेश मंदिर, पेरिस: इसकी स्थापना 1985 मेंहुई थी। इस मंदिर के सभी पुजारी मद्रास सेआतेहैं। श्रीलंका मेंपांच विशेष धातुओं से बनी गणेश प्रतिमा इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है।

पशुपतिनाथ मंदिर: भगवान पशुपति (भगवान शिव) को समर्पित, और बागमती नदी के पास नेपाल के काठमांडू मेंस्थित है। मंदिर को 1979 मेंविश्व धरोहर स्थल के रूप मेंवर्गीकृत किया गया था।

प्रम्बानन मंदिर: इंडोनेशिया के जावा में9वीं शताब्दी का एक हिंदूमंदिर परिसर है। यह त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को समर्पित है। यह इंडोनेशिया मेंसबसेबड़ा हिंदूमंदिर स्थल हैऔर अंकोरवाट के बाद दक्षिण पूर्व एशिया मेंदूसरा सबसे बड़ा मंदिर स्थल है। इसे 1991 में UNESCO के विश्व धरोहर स्थल मेंशामिल किया गया था।

श्री हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान मेंसबसे बड़ा हिंदूतीर्थस्थल है। यह कराची सेलगभग 250

किमी पश्चिम-उत्तर पश्चिम मेंबलूचिस्तान प्रांत में स्थित है।

ढाकेश्वरी मंदिर, बांग्लादेश का राष्ट्री य मंदिर (राज्य स्वामित्व वाला), यह बांग्लादेश मेंसबसे बड़ा हिंदूमंदिर है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठोंमेंसे एक है।

दुबई हिंदू मंदिर: संयुक्त अरब अमीरात मेंदूसरा हिंदूमंदिर (दूसरा अबूधाबी मेंBAPS हिंदूमंदिर है)। मंदिर की वास्तुकला मेंएक अनोखा अरबी दृश्य है।

श्री काली मंदिर: बर्माके यांगून मेंस्थित एक हिंदू मंदिर है। इसका निर्माण 1871 मेंतमिल प्रवासियों द्वारा किया गया था, जबकि बर्माप्रांत ब्रिटिश भारत का भाग था।

 

भारत/विश्व मेंप्रसिद्ध गुरुद्वार

आनंदपुर साहिब: भारत के पंजाब के रूपनगर जिले(रोपर) मेंस्थित है। इसेसिख धर्मका सबसे पवित्र स्थान माना जाता हैयहां पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी नेअपनेजीवन के 25 वर्ष शिक्षण और अनुशासन का मार्गदर्शन करतेहुए बिताए है।

गोइंदवाल साहिब: ब्यास नदी के तट पर स्थित है और तरण तारण जिलेमेंलघुउद्योगों के मुख्य केंद्रोंमेंसेएक है।

तीसरे सिख गुरु, गुरु अमर दास, 33 वर्षों तक गोइंदवाल मेंरहे। यह वह स्थान हैजहां पर गुरु अमर दास की मुलाकात गुरु राम दास सेहुई थी। गुरु अर्जन देव का जन्म भी इसी स्थान पर 15 अप्रैल 1563 को हुआ था।

हेमकुं ड साहिब (गुरुद्वारा श्री हेमकुं ड साहिब जी): उत्तराखंड के चमोली जिलेमेंस्थित है। यह दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित हैऔर इसका उल्लेख दशम ग्रंथ मेंमिलता है। हेमकुं ड एक संस्कृत नाम हैजो हेम ("बर्फ") और कुं ड ("कटोरा") सेलिया गया है।

ननकाना साहिब: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ननकाना साहिब जिले में स्थित है। ननकाना साहिब को पहलेराय भोई की तलवंडी के नाम से जाना जाता था, लेकिन अंततः गुरु नानक के सम्मान मेंइसका नाम बदल दिया गया।

गुरुद्वारा ननकाना साहिब का निर्माण 1600 ईसी मेंगुरु नानक देवजी के पोते, बाबा धरम चंद द्वारा किया गया था और कहा जाता हैकि महाराजा रणजीत सिंह ने 1819 - 1820 ईसी के बीच इसकी मरम्मत करवाई थी।

पटना साहिब (तख्त श्री हरिमंदिर जी): पटना गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह वह स्थान है जहां गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म 1666 मेंहुआ था। इसका निर्माण भी महाराजा रणजीत सिंह ने करवाया था।

फतेहगढ़ साहिब (सरहिंद): पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिलेमेंस्थित है। वजीर खान के

शासनकाल के दौरान, सिख गुरु गोबिंद (सिखोंके दसवेंगुरु) के दो युवा पुत्रों की इसी सरहिंद में हत्या कर दी गई थी।

राजा करम सिंह नेइस स्थान का नाम सरहिंद से बदलकर नया फतेहगढ़ साहिब कर दिया था।

तरनतारन साहिब: भारत के पंजाब के तरनतारन जिलेमेंस्थित है। इसकी स्थापना गुरु अर्जन देव ने की थी, जो सिख समुदाय के पांचवेंगुरु थे।

तरनतारन जिले का गठन 2006 मेंतत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा अमृतसर जिलेसे किया गया था।

बाबा बकाला: भारत के पंजाब के अमृतसर जिले मेंस्थित है। यह 9वेंसिख गुरु, गुरु तेग बहादुर से गहरा सम्बन्ध था।

गुरुद्वारा पातालपुरी: पंजाब के रूपनगर जिलेमें स्थित है। यह सतलज नदी के तट पर बना है। 1644 मेंगुरु हरगोबिंद और 1661 मेंगुरु हर राय का गुरुद्वारा पातालपुरी मेंअंतिम संस्कार किया गया था।

स्वर्ण मंदिर (श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर): अमृतसर, पंजाब, भारत मेंस्थित है। हरमंदिर साहिब जिसेस्वर्णमंदिर के नाम सेभी जाना जाता है, गुरु अर्जन देव (1581-1606) द्वारा बनवाया गया था।

उन्होंनेसिखोंकी पवित्र पुस्तक गुरु ग्रंथ साहिब भी लिखी। श्री अकाल तख्त साहिब स्वर्ण मंदिर परिसर मेंस्थित है। गुरु राम दास (चौथेगुरु) अमृतसर के संस्थापक थे।

करतारपुर साहिब गलियारा: यह भारत के गुरदासपुर में डेरा बाबा नानक तीर्थस्थल को पाकिस्तान मेंकरतारपुर गुरुद्वारा सेजोड़ता है, जो रावी नदी के तट के पास स्थित है।

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर, शकरगढ़, नरोवाल जिला, पंजाब, पाकिस्तान मेंस्थित है। करतारपुर कॉरिडोर 9 नवंबर 2019 को पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान द्वारा खोला गया था।

गुरुद्वारा सीस गंज साहिब: यह दिल्ली मेंस्थित है। 11 नवंबर 1675 को औरंगजेब के आदेश पर गुरु तेग बहादुर का सिर यहींपर काट दिया गया था।

तख्त श्री दमदमा साहिब: तलवंडी साबो, पंजाब मेंस्थित है। इसका निर्माण गुरु गोबिंद सिंह की याद मेंकिया गया था। इसेगुरु की काशी के नाम सेभी जाना जाता है। पंजाब मेंकई लड़ाइयों के बाद, गुरु गोबिंद सिंह जनवरी 1706 मेंतलवंडी साबो पहुंचेऔर कई महीनों तक वहां रहे। इस स्थान को अब दमदमा साहिब (विश्राम का स्थान) कहा जाता है।

 

भारत/विश्व मेंप्रसिद्ध मस्जिदें

जामा मस्जिद, दिल्ली: इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँके द्वारा किया गया था। शाहजहाँ 5वेंमुगल सम्राट थे।

मोती मस्जिद (दिल्ली के लाल किलेमें): इसे 1659-60 मेंसम्राट औरंगजेब नेबनवाया था। मोती मस्जिद (आगरा के लाल किले में): इसे शाहजहाँनेबनवाया था।

जामा मस्जिद (आगरा): आगरा किलेके सामने स्थित है।

नगीना मस्जिद: यह आगरा के किलेमेंस्थित है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँनेबंगाल शैली मेंकरवाया था।

ताज-उल-मसाजिद: यह भोपाल मेंस्थित हैऔर इसेभारत की सबसेबड़ी मस्जिदोंमेंसेएक माना जाता है, और एशिया की सबसेबड़ी मस्जिदोंमेंसे एक है। मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के शासनकाल के दौरान नवाब शाहजहाँ बेगम द्वारा शुरू किया गया था। इसे 'मस्जिदोंका ताज' के नाम सेजाना जाता है।

अजमेर शरीफ दरगाह: यह राजस्थान के अजमेर मेंस्थित है। यह सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है। इसका निर्माण मुगल सम्राट हुमायूं के द्वारा किया गया था।

हाजी अली दरगाह: दक्षिणी मुंबई मेंवर्ली के तट पर एक टापूपर स्थित है। यह एक मस्जिद और दरगाह या पीर हाजी अली शाह बुखारी का स्मारक है।

काबुली बाग मस्जिद: हरियाणा के पानीपत में स्थित है। इसका निर्माण सम्राट बाबर ने1526 में पानीपत के प्रथम युद्ध मेंसुल्तान इब्राहिम लोधी पर अपनी जीत को चिह्नित करनेके लिए किया था।

टीपूसुल्तान शाही मस्जिद: कोलकाता, भारत में स्थित है। इसका नाम मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के नाम पर रखा गया।

अटाला मस्जिद: भारत के उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिलेमेंस्थित है।

मलिक दीनार मस्जिद: भारत के केरल राज्य के कासरगोड शहर मेंथलंगारा मेंस्थित है।

जामा मस्जिद या जामी मस्जिद या बड़ी मस्जिद: जौनपुर, उत्तर प्रदेश मेंस्थित है। इस मस्जिद का निर्माण जौनपुर सल्तनत के हुसैन शाह शर्की के द्वारा किया गया था।

मूरिश मस्जिद: पंजाब के कपूरथला मेंस्थित है। इसेमोरक्को के मराकेश की ग्रैंड मस्जिद की तर्ज पर बनाया गया है। इसका निर्माण कपूरथला के अंतिम शासक महाराजा जगतजीत सिंह के द्वारा किया गया था।

मक्का मस्जिद: हैदराबाद, भारत ।

कटरा मस्जिद: मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल में

स्थित है। इसका निर्माण 18वींशताब्दी के दौरान किया गया था।

कदम रसूल मस्जिद: पश्चिम बंगाल में गौर, मालदा मेंस्थित है। कदम रसूल का अर्थहैपैगंबर के पैरोंके निशान।

मस्जिद मेंपत्थर पर हजरत मुहम्मद के पैरों के निशान हैं। इस मस्जिद का निर्माण सुल्तान नसीरुद्दीन नुसरत शाह नेकरवाया था।

अल-हरम मस्जिद: स्थित - मक्का। यह दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद है। इसे सबसे पहले खलीफा उमर इब्न अल-खत्ताब के नेतृत्व मेंबनाया गया था।

बादशाही मस्जिद: यह लाहौर मेंस्थित है। इसे औरंगजेब नेबनवाया था।

अल-अक्सा मस्जिद (क़िबली मस्जिद या क़िबली चैपल): यह यरूशलेम के पुराने शहर में अल-अक्सा मस्जिद परिसर मेंमुख्य सामूहिक मस्जिद या प्रार्थना कक्ष है।

 

भारत/विश्व मेंप्रसिद्ध चर्च

बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च: यह गोवा में स्थित है। कहा जाता हैकि इस विरासत स्थल में जेसुइट्स के संस्थापकों मेंसेएक, सेंट फ्रांसिस जेवियर के पार्थिव अवशेष हैं।

सेंट थॉमस चर्च: केरल के त्रिशूर जिलेमेंस्थित सेंट थॉमस चर्च भारत का सबसेपुराना चर्चहै। इसकी स्थापना 52 ईस्वी मेंसेंट थॉमस द्वारा की गई थी।

सेंट फ्रांसिस चर्च: यह कोच्चि शहर मेंस्थित है। यह भारत का सबसेपुराना यूरोपीय चर्चहै। इसी चर्चमें "वास्को डी गामा" को दफनाया गया था।

पादरी की हवेली: यह बिहार के पटना मेंस्थित सबसेपुराना चर्चहै।

सेंट पीटर्सबेसिलिका चर्च: यह वेटिकन सिटी, रोम मेंस्थित है। यह दुनिया का सबसेबड़ा चर्चहै। यह 'चर्च' 'ईसाइयों' से संबंधित है उसी प्रकार 'सिनागॉग' 'यहूदियों' सेसंबंधित है।

भारत मेंकुछ अन्य चर्च:-

सैंथोम कैथेड्रल बेसिलिका (चेन्नई तमिलनाडु), सांता क्रूज़ बेसिलिका (फोर्ट कोच्चि, केरल), सेंट फिलोमेना चर्च (मैसूर कर्नाटक), क्राइस्ट चर्च (शिमला, हिमाचल प्रदेश), सेंट पॉल कैथेड्रल (कोलकाता, पश्चिम बंगाल), इमैक्युलेट कॉन्सेप्शन कैथेड्रल (गुरुग्राम, हरियाणा), सेंट मैरी बेसिलिका (बैंगलोर, कर्नाटक), वेलानकन्नी चर्च(तमिलनाडु), मेडक कैथेड्रल (तेलंगाना), कैथेड्रल चर्चऑफ द रिडेम्पशन (नई दिल्ली, दिल्ली), बेसिलिका ऑफ अवर लेडी ऑफ द माउंट (मुंबई, महाराष्ट्र), सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल (नई दिल्ली, दिल्ली), ऑल सेंट्स कैथेड्रल (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश), सेंट थॉमस मेजर आर्ची एपिस्कोपल श्राइन, पलायूर (केरल में त्रिशूर जिला), सेंट थॉमस कैथेड्रल (मुंबई), सेंट

जेम्स चर्च (दिल्ली), ऑल सेंट्स चर्च (पुणे, महाराष्ट्र)