स्मारक
भारतीय राज्यों में प्रसिद्ध स्मारक
असम
रंग घर : यह असम ट्रंक रोड के किनारेऔर रंगपुर पैलेस के उत्तर-पूर्व मेंस्थित है। इसका निर्माण सबसे पहले स्वर्गदेव रुद्र सिंह के शासनकाल के दौरान बांस और लकड़ी सेकिया गया था और बाद मेंइसेस्वर्गदेव प्रमत्त सिंह के द्वारा ईंटोंसेपुनर्निर्माण किया गया था।
तलातल घर: यह 18वींसदी का महल और सैन्य अड्डा हैजो रंगपुर, शिवसागर, असम मेंस्थित है। इसमें2 सुरंगें, मिट्टी की सतह सेऊपर 4 मंजिलें और 3 भूमिगत मंजिलेंथीं।
करेंग घर (गढ़गांव पैलेस): यह असम के शिवसागर से15 किलोमीटर दूर गढ़गाँव मेंस्थित है। इसकी संरचना लकड़ी और पत्थर सेबनी थी। इसका निर्माण 1698 मेंसुखरुं गफा द्वारा शुरू किया गया था। स्वर्गदेव राजेश्वर सिंहा ने1752 ईस्वी मेंईंटोंऔर पत्थरोंसेबनेसात मंजिला महल के साथ वर्तमान स्थायी संरचना का निर्माण किया था।
पोवा मक्का: यह असम के हाजो मेंगरुराचल पहाड़ी पर स्थित है। यह पीर पीर गयासुद्दीन औलिया की कब्र है। इसका निर्माण प्रसिद्ध मुगल सम्राट शाहजहाँके शासनकाल के दौरान 1657 में सुजाउद्दीन मुहम्मद शाह के द्वारा किया गया था।
अहोम राजा का महल : यह असम के गढ़गांव में एक ऐतिहासिक इमारत है। इसका निर्माण राजा राजेश्वर सिंह के द्वारा 1752 ई. मेंकिया गया था। येचार मंजिला महल हैऔर इसकी छत का आकार गुंबद जैसा हैऔर इसमेंएक कक्ष भी है। महल मेंभूतल पर पश्चिम की ओर तीन हॉल हैं।
बिहार
गोल घर: यह बंगाल इंजीनियर्स के कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा तैयार किया गया एक विशाल अन्न भंडार हैऔर इसका निर्माण पटना में1786 ई. में किया गया था। इसका संरचना गुंबद की आकार का हैजिसकी ऊं चाई 29 मीटर तक है। गोलघर के शीर्षपर चढ़नेके लिए कुल 145 सीढ़ियाँहै जिसकी संरचना सर्पिलाकार है।
पत्थर की मस्जिद (सैफ खान की मस्जिद) - इसका निर्माण परवेज़ शाह (मुगल सम्राट जहांगीर के पुत्र) के द्वारा किया गया था। इस मस्जिद का निर्माण पत्थर से हुआ है, इसलिए इसका नाम "पत्थर की मस्जिद" है।
दिल्ली
कुतुब मीनार परिसर: येदिल्ली के महरौली में दिल्ली सल्तनत के स्मारक और इमारतेंहैं। इसमें
कुतुब मीनार, कुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद और अलाई दरवाजा शामिल हैं। इसे1993 मेंविश्व धरोहर स्थल मेशामिल किया गया था।
कुतुब मीनार: इसका निर्माण 1199 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा प्रारम्भ किया गया था और इसेइल्तुतमिश द्वारा पूरा किया गया था।
क़ुब्बत-उल-इस्लाम मस्जिद: इसका निर्माण 1192 ई. से1198 ई. के बीच कुतुबुद्दीन ऐबक के द्वारा किया गया था। अलाउद्दीन खिलजी नेइसका निर्माण जारी रखा और इसनेपूर्वतरफ दो और उत्तर तथा दक्षिणी की तरफ एक-एक प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया था।
अलाई दरवाजा: यह कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद का दक्षिणी प्रवेश द्वार है। इसका निर्माण 1311 ई. मेंसुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा किया गया था और यह लाल बलुआ पत्थर सेबना था। यह एक चौकोर गुंबदनुमा प्रवेश द्वार हैजिसका प्रवेश द्वार मेहराबनुमा हैऔर इसमेंएक कक्ष है।
कुतुब-अल-अक्ताब ख्वाजा सैय्यद मुहम्मद बख्तियार अल-हुसयानी कुतुब अल-दीन बख्तियार काकी दिल्ली के एक सुन्नी मुस्लिम सूफी फकीर, संत और चिश्ती संप्रदाय के विद्वान थे। उनकी दरगाह महरौली मेंजफर महल के निकट मेंस्थित हैऔर येदिल्ली की सबसेपुरानी दरगाह है।
इंडिया गेट (अखिल भारतीय युद्ध स्मारक): इसे सर एडविन लुटियंस द्वारा डिजाइन किया गया था। इसेअमर जवान ज्योति (अमर सैनिक की ज्वाला) कहा जाता है। 1971 सेयह भारत के अज्ञात सैनिकोंकी समाधि के रूप मेंकार्यकर रहा है।
जहाज़ महल: यह दिल्ली के महरौली में हौज़-ए-शम्सी के बगल मेंस्थित है। ऐसा अनुमान लगाया जाता हैकि इसका निर्माण लोदी वंश काल के दौरान एक मनोरंजन स्थल और सराय के रूप मेंकिया गया था।
अन्य प्रसिद्ध स्मारक:
लाल किला - इसका निर्माण शाहजहाँ (मुग़ल सम्राट) के द्वारा किया गया था।
पुराना किला - हुमायूँऔर शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित।
मोती मस्जिद - औरंगजेब द्वारा निर्मित। खिड़की मस्जिद - तुगलक वंश के शासकोंद्वारा निर्मित।
जंतर-मंतर - सवाई जय सिंह द्वारा निर्मित।
गुजरात
तीन दरवाजा: यह अहमदाबाद के भद्रा किलेके पूर्वमेंएक ऐतिहासिक प्रवेश द्वार है। इसेअहमद शाह प्रथम अहमदाबाद की स्थापना के तुरंत बाद बनवाया था और 1415 मेंपूर्णहुआ।
हरियाणा
विश्वामित्र का टीला: यह हरियाणा के कुरूक्षेत्र के पिहोवा जिलेमेंसरस्वती नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। ऋग्वेद के तीसरेमंडल के रचयिता
विश्वामित्र थे। इन्होंनेप्रसिद्ध गायत्री मंत्र की रचना की थी।
कर्नाटक
दरिया दौलत बाग: यह श्रीरंगपट्टनम (मैसूर) में स्थित एक महल है। टीपू सुल्तान (मैसूर के टाइगर) के द्वारा 1784 ई. मेंइस महल का निर्माण किया गया था।
मैसूर महल (अंबा विलास पैलेस): यह कर्नाटक के मैसूर मेंस्थित है। मैसूर को आमतौर पर 'महलों के शहर' के रूप मेंवर्णित किया जाता है, और यहां इस महल सहित सात महल हैं। यदुराय ने
14वींशताब्दी मेंपुरानेकिलेके अंदर पहला महल बनवाया था। वर्तमान मेइस संरचना का निर्माण 1897 से 1912 के मध्य किया गया था।
रंगीन महल: यह कर्नाटक राज्य मेंस्थित बीदर किले के अभिन्न हिस्सों मेंसे एक है। इसका निर्माण वर्ष1524 ई. मेंबीदर शासकोंद्वारा किया गया था। इसेरानी महल का नाम भी दिया गया है।
केरल
मट्टनचेरी पैलेस (डच पैलेस): यह केरल के कोच्चि मेंस्थित है। इसकी स्थापना लगभग 1545 ई. मेंपुर्तगालियों द्वारा कोच्चि राजवंश के राजा वीरा केरल वर्माको उपहार के रूप मेंकी गई थी।
कनककुन्नु पैलेस: यह तिरुवनंतपुरम (केरल) में नेपियर संग्रहालय के निकट स्थित है। इसका निर्माण त्रावणकोर के राजा श्री मूलम थिरुनल के शासनकाल के दौरान विश्वब्राह्मण की मदद से किया गया था। यह भारत का प्रथम डिजिटल गार्डन है।
लद्दाख
लेह पैलेस (लाचेन पालकर पैलेस): यह लद्दाख में लेह शहर की ओर देखनेवाला एक पूर्व शाही महल है। इसका निर्माण 1600 ई. मेंसेंगगे नामग्याल के द्वारा किया गया था।
महाराष्ट्र
गेटवेऑफ इंडिया 20वींसदी की प्रारम्भ मेंमुंबई (बॉम्बे) शहर मेंबनाया गया एक मेहराबनुमा स्मारक है। इसेदिसंबर 1911 मेंभारत आनेवाले प्रथम ब्रिटिश सम्राट, सम्राट जॉर्जपंचम और क्वीन मैरी के आगमन की स्मृति मेंबनाया गया था।
नमस्तेटॉवर: मुंबई मेंएक 310 मीटर (1,017 फीट) लंबा गगनचुंबी इमारत मेगा प्रोजेक्ट है। इसे एटकिन्स (दुबई ) द्वारा डिजाइन किया गया था।
चांद मीनार (चंद्रमा की मीनार): इसे 15वीं शताब्दी मेंराजा अलाउद्दीन बहमनी नेकिलेपर कब्ज़ा करनेकी याद मेंबनवाया था।
मध्य प्रदेश
शीश महल: यह मध्य प्रदेश के ओरछा किला परिसर मेंस्थित है। किला परिसर का निर्माण बुंदेला राजपूत वंश के महाराजा उद्देत सिंह द्वारा किया गया था। परिसर मेंस्थित स्मारक राजा महल, जहांगीर महल और फूल बाग हैं।
रजवाड़ा महल (होल्कर पैलेस): यह मध्य प्रदेश के इंदौर मेंस्थित है। इसका निर्माण मल्हार राव होल्कर (वर्ष 1747 ई. मेंहोल्कर राजवंश के संस्थापक) द्वारा शुरू किया गया था।
जहाज़ महल: यह मध्य प्रदेश के मांडू क्षेत्र में स्थित है। इसका निर्माण मांडूसुल्तान गयासुद्दीन खिलजी के शासन मेंकिया गया था।
पंजाब
शीश महल (प्लेस ऑफ मिरर): यह पटियाला (पंजाब) मेंस्थित था और इसका निर्माण महाराजा नरिंदर सिंह (1845-1862) के द्वारा मुख्य मोती बाग पैलेस के पीछेकिया गया था।
सराय नूरमहल: इसका निर्माण मुगल सम्राट जहांगीर के द्वारा 1605-1627 शताब्दी के अंत में किया गया था। यह जालंधर (पंजाब) के निकट स्थित है। इसका निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर की
पत्नी नूरजहाँके आदेश पर ज़कारिया खान (1618 ई. मेंदोआब के गवर्नर) की देखरेख मेंकिया गया था।
राजस्थान
अढ़ाई दिन का झोंपड़ा (अजमेर): इसे1192 ई. मेंकुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनवाया गया था और हेरात के अबूबक्र द्वारा डिजाइन किया गया था। इसका संरचना 1199 ई. मेंबनकर तैयार हुआ
था।
कीर्ति स्तंभ (75 फीट): यह 12वीं शताब्दी का एक मीनार हैजो चित्तौड़गढ़ के चित्तौड़ किलेमें स्थित है। मालवा पर अपनी जीत का जश्न मनानेके लिए राणा कुम्भा द्वारा बनवाया गया था। इसेजीजा भगेरवाला नेडिजाइन किया था।
शीश महल (मिरर पैलेस): यह राजस्थान के जयपुर के आमेर किलेमेंस्थित है। इसका निर्माण 16वीं शताब्दी मेंप्रारम्भ हुआ था और जो 1727 ई. मेंपूर्णहुआ।
हवा महल: यह जयपुर (राजस्थान) मेंस्थित है। इसका निर्माण 1799 ई. मेंजयपुर शहर के संस्थापक महाराजा सवाई प्रताप सिंह (महाराजा सवाई जय सिंह के पोते) द्वारा किया गया था। इसे लाल चंद उस्ताद नेडिजाइन किया था।
मानसून पैलेस (सज्जन गढ़ पैलेस): यह जयपुर (राजस्थान) शहर मेंफतेह सागर झील की ओर देखने वाला एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित महलनुमा निवास है। इसे1884 ई. मेंमेवाड़ के महाराणा सज्जन सिंह के लिए निर्माण गया था और उनके नाम पर इसका नाम सज्जनगढ़ रखा गया था।
लालगढ़ पैलेस: यह राजस्थान के बीकानेर में
स्थित है। इसका निर्माण 1902 से1926 के मध्य सर गंगा सिंह (बीकानेर के महाराजा) के लिए किया गया था। इसका नाम उनके पिता महाराजा लाल सिंह की याद मेंरखा गया है। इसेब्रिटिश
वास्तुकार सर सैमुअल स्विंटन जैकब के द्वारा डिजाइन किया गया था।
उम्मेद भवन महल : यह राजस्थान के जोधपुर में स्थित है। इसका निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह के शासनकाल मेंहुआ था। यह आखिरी रॉयल पैलेस हैजो आजादी सेपहलेभारत मेंबनाया गया था।
अन्य प्रसिद्ध स्मारक: आमेर किला, सिटी पैलेस, जंतर मंतर, मेहरानगढ़ किला, जैसलमेर किला, कुं भलगढ़ किला, चित्तौड़गढ़ किला।
तमिलनाडु
विवेकानन्द रॉक मेमोरियल: यह कन्याकुमारी, तमिलनाडुमेंएक लोकप्रिय पर्यटक स्मारक है। इसका निर्माण 1970 मेंस्वामी विवेकानन्द के सम्मान मेंकिया गया था।
थिरुमलाई नायक्कर (नायक) महल: यह तमिलनाडुके मदुरै मेंस्थित है। इसका निर्माण 1635 ई. में मदुरै के नायक वंश के राजा तिरुमाला नायक के द्वारा किया गया था।
त्रिपुरा
उज्जयंता महल (नुयुंगमा): मूल उज्जयंता महल 1862 ई. मेंराजा इशान चंद्र माणिक्य द्वारा निर्माण किया गया था। हालाँकि, यह 1897 ई. मेअसम मे आए भूकं प के कारण नष्ट हो गया था। वर्तमान उज्जयंता महल का पुनर्निर्माण 1901 मेंमहाराजा राधा किशोर माणिक्य द्वारा किया गया था और इसका नाम रवीन्द्रनाथ टैगोर नेनुयुंगमा रखा था।
तेलंगाना
चारमीनार: यह हैदराबाद, तेलंगाना मेंस्थित एक स्मारक है। इसका निर्माण मुहम्मद कुली कुतुब शाह के द्वारा 1591 ई. मेंअपनी राजधानी को गोलकुं डा से नव-निर्मित शहर हैदराबाद में स्थानांतरित करने के बाद किया था। इसका डिजाइन मीर मोमिन अस्टाराबादी के द्वारा किया गया था।
चौमहल्ला महल (चौमहल्ला या चार महल): यह हैदराबाद के निज़ामों का महल है। इसका निर्माण निज़ाम सलाबत जंग के द्वारा किया गया था।
पश्चिम बंगाल
विक्टोरिया स्मारक: यह पश्चिम बंगाल के मध्य कोलकाता के मैदान मेंएक बड़ी संगमरमर की इमारत है। इसका निर्माण 1906 से1921 के मध्य तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के द्वारा किया गया था।
दाखिल दरवाजा (मालदा): इसे 1425 ई. में अलाउद्दीन हुसैन शाह की देख रेख मेंएक प्रवेश द्वार के रूप मेंनिर्माण किया गया था। इसका
निर्माण इंडो-इस्लामिक (टेराकोटा निर्माण) शैली मेंकिया गया था।
शहीद मीनार (ऑक्टरलोनी स्मारक): यह कलकत्ता मेंस्थित एक स्मारक हैजिसे1828 ई. में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कं पनी के कमांडर मेजर-जनरल सर डेविड ऑक्टरलोनी की याद में बनाया गया था। इसे जे. पी. पार्कर के द्वारा डिज़ाइन किया गया था। यह टावर 48 मीटर (157 फीट) ऊं चा है।
ब्लैक हॉल: कलकत्ता का ब्लैक हॉल एक कालकोठरी जेल थी जहां 1756 ई. मेंब्रिटिश सैनिकों को रात भर भीषण परिस्थितियों मेंबंदी बनाकर रखा गया था।
हज़ारदुआरी महल (बारा कोठी): यह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद मेंकिला निज़ामत के परिसर मेंस्थित है। इसका निर्माण नवाब नाजिम हुमायूँ जाह के शासनकाल में वास्तुकार डंकन मैकलियोड के द्वारा किया गया था।
अन्य प्रसिद्ध स्मारक: शांतिनिकेतन - रवीन्द्रनाथ टैगोर। बेलूर मठ - स्वामी विवेकानन्द।
उत्तर प्रदेश
बड़ा इमामबाड़ा (अस्फ़ी इमामबाड़ा): यह लखनऊ मेंएक इमामबाड़ा परिसर है। इसे1785 ई. मेंअवध के नवाब आसफुद्दौला के द्वारा किया गया था। यह निज़ामत इमामबाड़ा के बाद दूसरा सबसेबड़ा इमामबाड़ा है। यह बादशाही मस्जिद की परिपक्वता को दर्शाता है।
छोटा इमामबाड़ा (इमामबाड़ा हुसैनाबाद मुबारक): यह लखनऊ शहर मेंस्थित एक भव्य स्मारक है। इसेमुहम्मद अली शाह (1838 ई. में अवध के नवाब) द्वारा शिया मुसलमानों के लिए एक इमामबाड़ा या एक मण्डली हॉल के रूप में निर्माण किया गया था। इस इमारत को रोशनी के महल के नाम सेभी जाना जाता है।
रूमी दरवाजा (60 फीट ऊं चा): यह लखनऊ में स्थित है। इसे1784 ई. मेंनवाब आसफ़उद्दौला के द्वारा निर्माण किया गया था। यह बड़ा इमामबाड़ा और छोटा इमामबाड़ा के मध्य स्थित है।
बुलंद दरवाजा (विजय का द्वार) 1575 ई. में मुगल सम्राट अकबर नेगुजरात पर अपनी जीत की याद मेंबनवाया था। यह आगरा के फ़तेहपुर सीकरी मेंजामा मस्जिद का मुख्य प्रवेश द्वार है। बुलंद दरवाजा दुनिया का सबसेऊं चा प्रवेश द्वार है।
आगा खां और हाथीखाना की हवेली: यह आगरा मेंताज महल के पूर्वी किनारेपर स्थित है। इसे 2019 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा 'राष्ट्री य स्मारक' घोषित किया गया था।
ताज महल (आगरा): इसेशाहजहाँ(मुग़ल सम्राट) ने अपनी पत्नी मुमताज महल के सम्मान में बनवाया था। इसका निर्माण 1632 ई. मेंप्रारम्भ हुआ था। इसे1983 मेंयूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मेशामिल किया गया था। इसेउस्ताद अहमद लाहौरी के द्वारा डिजाइन किया गया था। 2007 में इसेविश्व के सात अजूबोंमेंशामिल किया गया।
शीश महल: यह उत्तर प्रदेश के आगरा किलेमें स्थित है। इसेशाहजहाँने1631-1640 ई. के मध्य बनवाया था।
पंच महल: यह फ़तेहपुर सीकरी, आगरा, उत्तर प्रदेश मेंएक महल है। इसका निर्माण अकबर के द्वारा किया गया था।
शीश महल: यह सिकं दरा (आगरा, उत्तर प्रदेश) मेंअकबर के मकबरेके निकट स्थित है। इसका निर्माण जहाँगीर के द्वारा सन्1605 से1619 ई. के मध्य किया गया था।